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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट संकट पर सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। बैठक में पेट्रोलियम मंत्री और विदेश मंत्री ने विपक्ष के सवालों के जवाब दिए। सरकार ने बताया गया किसी तरह की पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कोई कमी नहीं है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सरकार ने साफ संदेश दिया कि देश में हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और किसी भी तरह से घबराने की जरूरत नहीं है। बैठक का मकसद विपक्ष को मौजूदा स्थिति से अवगत कराना और राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता दिखाना था। बैठक में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से जुड़े मंत्री मौजूद रहे, जिनमें अमित शाह, एस जयशंकर और निर्मला सीतारमण शामिल हैं। इसके अलावा जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू भी बैठक में शामिल हुए। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने वैश्विक हालात और पश्चिम एशिया के संकट पर विस्तार से जानकारी दी। कांग्रेस के तारिक अनवर और मुकुल वासनिक, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और बीजद के सस्मित पात्रा भी बैठक में मौजूद रहे।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोज पर भी हुई चर्चा
बैठक में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोज की स्थिति पर भी चर्चा हुई, जिसे लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है। सरकार ने बताया कि अभी तक हमारे 4 शिप्स वहां से निकल चुके हैं और कुछ और जल्दी निकलेंगे। ये हमारे लिए बड़ी बात है। कई देशों के शिप अभी फंसे हुए हैं। बताया जाता है कि बैठक में जब ईरान के साथ पाकिस्तान की मध्यस्थता का मुद्दा उठा तो सरकार की ओर से बताया गया कि यह प्रक्रिया कोई नई नहीं है, बल्कि यह तो 1981 से चल रहा है। एक तरह से यूएस ने सालों से पाकिस्तान को ईरान के साथ बातचीत में लगा रखा है।
पीएम के बयान पर विपक्ष ने जताई चिन्ता
विपक्ष ने बैठक में प्रधानमंत्री की ओर से संसद में दिए गए कोविड से जुड़े बयान पर भी चिंता जताई। विपक्ष का कहना था कि इस तरह के बयान से देश में पैनिक के हालात बन सकते हैं। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि ऐसा नहीं है, लेकिन अगर कहीं ऐसा है तो हम उसको देख रहे हैं।
ट्रंप से हुई बातचीत की भी दी जानकारी
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बातचीत हुई है। इस बातचीत में भारत की स्पष्ट नीति दोहराई गई और प्रधानमंत्री ने कहा कि हमको वॉर नहीं चाहिए।



