कर्नल सोफिया मामला अब एक बेहद अहम कानूनी मोड़ पर पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह को फिलहाल कोई राहत नहीं दी है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने मामले में अभियोजन मंजूरी की प्रक्रिया में दखल देने से साफ इनकार कर दिया।
कर्नल सोफिया मामला में सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ का रुख
दरअसल 31 अगस्त 2026 को इस महत्वपूर्ण मामले पर शीर्ष अदालत में अहम सुनवाई हुई। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने की।
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गौरतलब है कि मंत्री कुंवर विजय शाह पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक और सांप्रदायिक टिप्पणी करने का आरोप है। इसलिए अदालत ने पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।
एसआईटी की जांच पूरी और सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश
इस बीच अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को जांच की वर्तमान प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस की विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है।
इसके बाद जांच टीम ने अपनी पूरी जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश की। वहीं सरकारी पक्ष ने अदालत को स्पष्ट किया कि मामले में सभी आवश्यक कानूनी तथ्य जुटा लिए गए हैं।
कर्नल सोफिया मामला और अभियोजन मंजूरी पर राज्यपाल का अधिकार
बहरहाल मंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए एक वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। इसलिए मंत्री के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने के लिए आवश्यक अभियोजन मंजूरी की मांग की गई है।
इसके अलावा यह मामला अभी सक्षम प्राधिकारी यानी राज्य के राज्यपाल के समक्ष विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल को इस पर स्वतंत्र निर्णय लेने दिया जाना चाहिए:
अभियोजन मंजूरी का निर्णय केवल सक्षम संवैधानिक प्राधिकारी ही ले सकता है।
न्यायालय इस प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया में समय से पूर्व कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा।
मंजूरी मिलने के तुरंत बाद संबंधित अदालत में औपचारिक आरोपपत्र पेश किया जाएगा।
सार्वजनिक माफी की दलील पर अदालत से नहीं मिली राहत
सुनवाई के दौरान मंत्री विजय शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने उनका पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि मंत्री ने विवादित बयान के अगले ही दिन सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केवल माफी के आधार पर आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने से इनकार कर दिया। नतीजतन अदालत ने साफ कहा कि कानून के तहत तय प्रक्रिया का पालन होना जरूरी है।
सक्षम अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने की आगे की प्रक्रिया
फिलहाल शीर्ष अदालत ने राज्यपाल के फैसले का इंतजार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार अभियोजन मंजूरी मिलते ही सक्षम अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में तुरंत चार्जशीट दाखिल होगी।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन मंजूरी पर फैसला आने तक मामले की अगली सुनवाई को स्थगित कर दिया। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राजभवन से अभियोजन को लेकर क्या फैसला आता है।



