नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक विवाद अब और तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा पार्टी के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो अंतरे गाने के पुराने फैसले को दोहराए जाने के बाद भाजपा ने शनिवार को इस निर्णय के खिलाफ बाकायदा प्रस्ताव पारित किया। भाजपा ने कहा कि राष्ट्रीय गीत के सम्मान, गरिमा और ऐतिहासिक विरासत से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस ने लिया था दो अंतरे गाने का फैसला
विवाद की जड़ कांग्रेस कार्यसमिति के 1937 के उस निर्णय में है, जिसके तहत सार्वजनिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो अंतरों को ही गाने की परंपरा तय की गई थी। कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला उस समय की परिस्थितियों और विभिन्न समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया था। कांग्रेस ने 19 अगस्त 2026 को अपने पुराने रुख को फिर से कायम रखने का निर्णय लिया। पार्टी नेताओं का तर्क है कि यह कोई नया फैसला नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से चली आ रही कांग्रेस की परंपरा का हिस्सा है।
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भाजपा चलाएगी देशव्यापी अभियान
भाजपा ने कांग्रेस के इस निर्णय को ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रीय सम्मान को सीमित करने वाला कदम बताया है। शनिवार को भाजपा ने प्रस्ताव पारित करते हुए कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले की निंदा की। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा हुआ प्रतीक है। भाजपा का कहना है कि इसके सम्मान के मामले में राजनीतिक समझौता नहीं किया जा सकता। भाजपा के प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि पार्टी ‘वंदे मातरम्’ की पूर्ण विरासत, गरिमा और राष्ट्रीय स्वरूप की रक्षा के लिए देशव्यापी अभियान चलाएगी।
भाजपा लगा रही है तुष्टिकरण का आरोप
इस मुद्दे ने सिर्फ राष्ट्रगीत के गायन तक सीमित राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के पुराने फैसले को लेकर उस पर तुष्टीकरण और वोट-बैंक की राजनीति के आरोप लगाए हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस के रुख की तुलना ऐतिहासिक मुस्लिम लीग के रुख से तक की है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस को ‘वंदे मातरम्’ के पूरे स्वरूप को स्वीकार करना चाहिए और पुराने राजनीतिक समझौते को आज के राष्ट्रीय संदर्भ पर लागू नहीं करना चाहिए।
कांग्रेस अलाप रही अलग ही राग
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ कांग्रेस के लिए भी सम्मान और भावनाओं से जुड़ा विषय है। कांग्रेस के नेताओं ने यह भी याद दिलाया कि 1937 में यह फैसला महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा के हमले पर पलटवार करते हुए सवाल उठाया है कि अगर पुराने फैसले को लेकर कांग्रेस के नेताओं को कठघरे में खड़ा किया जा रहा है तो उस समय के महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल जैसे नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाने होंगे।



