Dehradun Breaking News: उत्तराखंड में निहंग सिखों की एंट्री ने पुलिस-प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीमाओं पर कड़ी निगरानी, बैरिकेडिंग और भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद निहंगों का एक जत्था सुरक्षा घेरा पार कर देहरादून शहर के पटेलनगर थाना क्षेत्र तक पहुंच गया। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस और खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है।
कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग में हुए विवादों के बाद निहंगों के उत्तराखंड कूच की सूचना मिलते ही प्रशासन अलर्ट पर था। कुल्हाल बॉर्डर और प्रेमनगर में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। वाहनों की सघन जांच, बैरिकेडिंग और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन इसके बावजूद निहंग वैकल्पिक रास्तों से शहर तक पहुंचने में सफल रहे।
👉 यह भी पढ़ें:

सूत्रों के अनुसार, पुलिस को जब निहंगों के पटेलनगर पहुंचने की जानकारी मिली तो स्थानीय पुलिस तुरंत सक्रिय हुई। अधिकारियों ने बातचीत और समझाइश के बाद जत्थे को वापस भेज दिया। हालांकि इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि जब सीमाओं पर इतनी कड़ी सुरक्षा थी, तो जत्था शहर तक कैसे पहुंच गया।
बताया जा रहा है कि चंडीगढ़ से हिमाचल के रास्ते उत्तराखंड की ओर बढ़ रहे करीब 200 निहंगों को पहले कुल्हाल चेक पोस्ट पर रोका गया था। प्रशासन और निहंगों के बीच कई घंटों तक बातचीत चली, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद कुछ निहंग लौट गए, जबकि 20 से 30 निहंग बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ गए। इस दौरान तलवारें लहराने और पुलिस द्वारा लगाए गए डंपरों में तोड़फोड़ की भी सूचना सामने आई।
निहंगों का कहना था कि वे हेमकुंड साहिब जाना चाहते हैं। दूसरी ओर, प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें आगे बढ़ने से रोकने पर अड़ा रहा। स्थिति को देखते हुए देहरादून के जिलाधिकारी और एसएसपी स्वयं भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। बाद में पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने का दावा किया।
प्रशासन का कहना है कि फिलहाल हालात सामान्य हैं और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। वहीं, इस घटना के बाद उत्तराखंड में सुरक्षा व्यवस्था, खुफिया इनपुट और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।



