नई दिल्ली/लखनऊ: फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार सुबह बड़ी कार्रवाई की है। ED की टीमों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के तीन शहरों में कुल 9 ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, ED के लखनऊ जोनल कार्यालय की टीम ने जम्बूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड से जुड़े मामले में यह कार्रवाई की है। जांच एजेंसी को आशंका है कि बिना वास्तविक माल की आवाजाही के फर्जी चालान और ई-वे बिल तैयार कर फर्जी ITC हासिल किया गया और उसे दूसरी कंपनियों को आगे पास किया गया।
👉 यह भी पढ़ें:
- गुजरात में ‘नकली सरकारी दफ्तर’ का बड़ा घोटाला! 121 फर्जी काम, 22.70 करोड़ की संपत्ति पर ED का शिकंजा
- Uttar Pradesh विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटीं मायावती, पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ को फिर से पार्टी से निकाला
- Gorakhpur Encounter: STF ने 1 लाख के इनामी बदमाश मुस्तफिजुल उर्फ बाबू को किया ढेर, कई राज्यों में हत्या के केस दर्ज
- उत्तर प्रदेश में तूफान और बारिश का कहर: 74 लोगों की मौत, कई जिलों में मची भारी तबाही
- उत्तर प्रदेश में बड़ा आतंकी खुलासा: पाकिस्तानी हैंडलर्स से जुड़े दो संदिग्ध गिरफ्तार, संवेदनशील ठिकाने थे निशाने पर
- उत्तरप्रदेश; माघी पूर्णिमा पर श्रद्धा की डुबकी
मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में छापे
ED की कार्रवाई मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में की जा रही है। तलाशी के दौरान जांच टीम दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण सबूतों की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी से सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
जांच में कथित तौर पर कई फर्जी और कागजी कंपनियों के जरिए बड़े पैमाने पर सर्कुलर ट्रांजेक्शन, रकम की लेयरिंग और नकदी निकासी का पता चला है। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग हैं और पैसा किन खातों तथा कंपनियों के जरिए घुमाया गया।

₹9.63 करोड़ का फर्जी ITC हासिल करने का आरोप
जीएसटी अधिकारियों की जांच के अनुसार, संबंधित नेटवर्क पर करीब ₹9.63 करोड़ का ITC गलत तरीके से हासिल करने और लगभग ₹10.28 करोड़ का ITC आगे पास करने का आरोप है। यानी जांच में कुल मिलाकर करीब ₹19.91 करोड़ के संदिग्ध ITC लेनदेन की कड़ियां सामने आई हैं।
ED के मुताबिक, इस कथित फर्जीवाड़े से सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि फर्जी कंपनियों के जरिए हासिल की गई रकम को किस तरह अलग-अलग लेनदेन में घुमाया गया और बाद में नकदी के रूप में निकाला गया।
PMLA के तहत ED की जांच तेज
जांच एजेंसी के अनुसार, अवैध तरीके से हासिल की गई रकम ‘Proceeds of Crime’ यानी अपराध से हुई कमाई के दायरे में आ सकती है। इसी आधार पर ED मनी ट्रेल, फर्जी कंपनियों के नेटवर्क और संदिग्ध लेनदेन की पूरी कड़ी खंगाल रही है।
फिलहाल छापेमारी जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस कथित ITC नेटवर्क में कितने लोग और कंपनियां शामिल हैं।



