नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई करने को कहा है। इधर, नाम वापसी की आज अंतिम तारीख है।
गुरुवार को वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति पीके मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए इसे अत्यंत तत्काल सुनवाई योग्य मामला बताया। सिंगी ने शीघ्र सुनवाई या अंतरिम आदेश की मांग की। अदालत ने उनकी दलीलों पर संज्ञान लेते हुए मामले को कल यानी शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
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सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में दी दलील
सिंघवी ने दलील दी कि रिटर्निंग ऑफिसर ने यह कहते हुए नामांकन खारिज किया कि नटराजन ने लंबित आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी, जबकि वास्तव में केवल समन जारी हुआ था और मामले में अभी तक संज्ञान भी नहीं लिया गया था। उन्होंने कहा कि यहां तक कि संज्ञान भी नहीं लिया गया था, फिर भी नामांकन खारिज कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पढ़ने के लिए मांगा समय
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें इस याचिका की कॉपी ही नहीं दी गई है। इसे पढ़ने के लिए समय की जरूरत है। इसके जवाब में सिंघवी बोले- सुनवाई भले ही कल हो जाए लेकिन तब तक रिजल्ट घोषित न किया जाए। इसके बाद अदालत ने कहा- ऐसे मामलों में कानून पहले से तय है। याचिका को कल के लिए सूचीबद्ध किया जाता है। कांग्रेस ने ये याचिका बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात 1 बजकर 48 मिनट पर डिजिटल माध्यम से दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने गैर-कानूनी, मनमाने और पक्षपातपूर्ण तरीके से फैसला किया है, इसे रद्द किया जाए।
रिटर्निगं ऑफिसर का निर्णय पक्षपातपूर्ण
कांग्रेस की याचिका में आरोप लगाया गया है कि रिटर्निंग ऑफिसर का निर्णय अवैध, मनमाना और पक्षपातपूर्ण है। साथ ही नामांकन खारिज करने के आदेश को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई, लेकिन साथ ही कहा कि वास्तविक कानूनी उपाय चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटीशन) दायर करना है।
मंगलवार को रद्द हुआ था नामांकन
उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने शपथ पत्र में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित प्रकरण की जानकारी नहीं दी है। इसी आधार पर भाजपा ने उनका नामांकन निरस्त करने की मांग की है। जांच के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द कर दिया।
कांग्रेस कह रही-कोई मामला दर्ज नहीं
इस मामले में कांग्रेस का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। पार्टी के अनुसार उन्हें केवल अदालत की ओर से नोटिस प्राप्त हुआ था, इसलिए शपथ पत्र में इसका उल्लेख करने का कोई दायित्व नहीं था। कांग्रेस का तर्क है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ किसी न्यायालय ने अभी तक आरोप तय नहीं किए हैं और न ही उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज है। इसलिए भाजपा की आपत्ति का कोई कानूनी आधार नहीं है। पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पहुंचकर अपनी बात रखी थी। अब कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंची है।
सिंघार ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- कांग्रेस को आज सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। चुनाव आयुक्त चाहते तो कल इस बारे में निर्णय दे सकते थे। खारिज करना या स्वीकार करना, यह विशेष अधिकार चुनाव आयोग को है। हरियाणा में चुनाव आयोग ने हस्तक्षेप किया था, गुजरात में हस्तक्षेप किया था तो एमपी में क्यों नहीं किया? सिंघार ने भोपाल में मीडिया से कहा- झारखंड में बीजेपी कैंडिडेट को आप (चुनाव आयोग) वैलिड कर सकते हैं तो मीनाक्षी नटराजन के मामले में फैसला क्यों नहीं लिया? इससे स्पष्ट है कि चुनाव आयोग भाजपा के रबर स्टैंप के रूप में काम कर रहा है।



