👉 यह भी पढ़ें:
- इमरान खान का मेडिकल चेकअप: अस्पताल से फिर अदियाला जेल भेजे गए, पाकिस्तान में सियासी हलचल तेज
- नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, गंभीर अपराध में शामिल लोगों को नहीं मिलेगी राहत
- Supreme Court ने कहा-शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार, सिर्फ आंदोलन होने से लाठीचार्ज करना जायज नहीं
- मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल, नाम वापसी की आखिरी तारीख आज
- इश्क करो पार्टी’ से राजनीति में एंट्री! पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज मार्कंडेय काटजू का बड़ा दांव, क्या बदल जाएगा राजनीतिक नैरेटिव?
- विनेश फोगाट को सुप्रीम कोर्ट से भी एशियन गेम्स के ट्रायल में शामिल होने की मिली मंजूरी
0:00 left
नई दिल्ली। यूपी में कांवड यात्रा के दौरान दुकानदारों को नेमप्लेट लगाने के योगी सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इस बीच अब एक बार फिर ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। हालांकि, अब कोर्ट में इसके समर्थन में याचिका डाली गई है। बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के साथ उत्तराखंड और मध्यप्रदेश सरकार को भी ऐसे ही आदेश पर नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सभी आदेशों पर अंतरिम रोक भी लगा दी थी।
मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी निर्देश का समर्थन करते हुए एक याचिकाकर्ता ने कहा कि इस मामले को जबरन साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुझे इस मामले में पक्षकार भी बनाया जाए। याचिकाकर्ता सुरजीत सिंह यादव ने कहा कि ये आदेश शिवभक्तों की सहूलियत, आस्था और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिया गया था। उन्होंने कहा कि इसे बेवजह साम्प्रदायिक रंग दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कांवड यात्रा के दौरान दुकान मालिकों को दुकानों के बाहर अपने नाम प्रदर्शित करने के लिए कहा था।
यूपी सरकार ने दिया था ये आदेश
उल्लेखनीय है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने तीन राज्य सरकारों के अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों पर अंतरिम रोक लगा दी थी कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों को ऐसी दुकानों के बाहर मालिकों के नाम प्रदर्शित करने चाहिए। यह निर्देश उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों में लागू किया गया था और मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए थे।



