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नई दिल्ली। पिछले कुछ समय से अपनी ही पार्टी में विवादित रहे कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी का रुख कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक रूप से उनकी एकमात्र सार्वजनिक असहमति ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ को लेकर थी। थरूर ने केरल साहित्य महोत्सव के एक सत्र के दौरान सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने उस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया था और उन्हें इसका ‘खेद नहीं‘ है।
उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की बैठक में नहीं शामिल होने पर शशि थरूर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह बैठक केरल विधानसभा चुनाव को लेकर थी। इससे पहले भी उनके बयानों पर पार्टी के कई नेता नाराजगी जता चुके हैं। राहुल गांधी ने हाल में कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर उनके मौजूद होने के बावजूद उनके नाम का उल्लेख नहीं किया और राज्य के नेताओं द्वारा बार–बार उन्हें ‘दरकिनार‘ करने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस सांसद ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि एक पर्यवेक्षक और लेखक के रूप में उन्होंने पहलगाम घटना के बाद एक अखबार में स्तंभ लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि इसकी सजा मिलनी चाहिए और ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ऐसे में उसे पाकिस्तान के साथ लंबे टकराव में नहीं पड़ना चाहिए और कोई भी कार्रवाई आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाने तक सीमित होनी चाहिए। कांग्रेस सांसद ने कहा कि उन्हें आश्चर्य हुआ कि भारत सरकार ने ठीक वही किया जैसा उन्होंने कहा था। थरूर ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ही यह प्रश्न किया था कि ‘अगर भारत खत्म हो जाएगा तो कौन जीवित रहेगा? कांग्रेस सांसद ने कहा कि बेहतर भारत के निर्माण की प्रक्रिया के तहत राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब राष्ट्रहित की बात आती है तो भारत को ही सर्वोपरि होना चाहिए।
नई दिल्ली। पिछले कुछ समय से अपनी ही पार्टी में विवादित रहे कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी का रुख कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक रूप से उनकी एकमात्र सार्वजनिक असहमति ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ को लेकर थी। थरूर ने केरल साहित्य महोत्सव के एक सत्र के दौरान सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने उस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया था और उन्हें इसका ‘खेद नहीं‘ है।
उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की बैठक में नहीं शामिल होने पर शशि थरूर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह बैठक केरल विधानसभा चुनाव को लेकर थी। इससे पहले भी उनके बयानों पर पार्टी के कई नेता नाराजगी जता चुके हैं। राहुल गांधी ने हाल में कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर उनके मौजूद होने के बावजूद उनके नाम का उल्लेख नहीं किया और राज्य के नेताओं द्वारा बार–बार उन्हें ‘दरकिनार‘ करने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस सांसद ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि एक पर्यवेक्षक और लेखक के रूप में उन्होंने पहलगाम घटना के बाद एक अखबार में स्तंभ लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि इसकी सजा मिलनी चाहिए और ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ऐसे में उसे पाकिस्तान के साथ लंबे टकराव में नहीं पड़ना चाहिए और कोई भी कार्रवाई आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाने तक सीमित होनी चाहिए। कांग्रेस सांसद ने कहा कि उन्हें आश्चर्य हुआ कि भारत सरकार ने ठीक वही किया जैसा उन्होंने कहा था। थरूर ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ही यह प्रश्न किया था कि ‘अगर भारत खत्म हो जाएगा तो कौन जीवित रहेगा? कांग्रेस सांसद ने कहा कि बेहतर भारत के निर्माण की प्रक्रिया के तहत राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब राष्ट्रहित



