नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बड़ा बयान दिया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि पूरी योजना और अपनी शर्तों पर रोका गया था। उन्होंने कहा कि मैं फिर स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि हमने यह ऑपरेशन इसलिए बंद नहीं किया कि हमारी क्षमता कम हो गई थी। हमने इसे अपनी मर्जी से रोका। जरूरत पड़ती तो हम लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार थे।
राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को थल, जल और वायु सेनाओं के बेहतरीन तालमेल का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि आर्मी, नेवी और एयर फोर्स ने एक साथ मिलकर यह दिखा दिया कि भारत की सैन्य शक्ति अब अलग-अलग नहीं, बल्कि एकीकृत और समन्वित रूप में काम करती है। यह बदलाव भारत की नई सैन्य सोच को दर्शाता है।
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आतंकवादी गतिविधि बर्दाश्त नहीं
राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का आतंकवाद के खिलाफ रुख बिल्कुल साफ है। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और पहलगाम घटना के बाद ऑपरेशन सिंदूर ये सब हमारे मजबूत रुख का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी आतंकी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग बढ़ी
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज दुनिया में भारत की पहचान सिर्फ आर्थिक या कूटनीतिक नहीं, बल्कि सैन्य ताकत से भी बन रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि आतंकवाद को किसी भी रूप में सही ठहराना खतरनाक है और यह शांति व विकास के लिए बड़ी चुनौती है। ऑपरेशन के बाद भारतीय रक्षा उत्पादों की वैश्विक मांग भी बढ़ी है। रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 62.66% अधिक है।
गलत हाथों में तकनीक बन जाएगी भस्मासुर
एआई के इस्तेमाल की तुलना पौराणिक राक्षस ‘भस्मासुर’ से करते हुए रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि अगर यह तकनीक गलत हाथों में पड़ जाए, तो यह कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है। रक्षा मंत्री ने कहा कि जब हम प्रतिरोध की बात करते हैं, तो हम एआई की सिर्फ अच्छी तस्वीर ही नहीं देख सकते। रक्षा मंत्री के तौर पर, मुझे देश की सुरक्षा व्यवस्था को बहुत विस्तार से समझने का अवसर मिला है।



