👉 यह भी पढ़ें:
- CM Yogi: अयोध्या में गरजे सीएम योगी, कहा-सपा और कांग्रेस ने किया हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ाने का पाप
- शंकराचार्य पद की मर्यादा सर्वोपरि’: माघ मेले विवाद पर सीएम योगी का जवाब, सपा ने उठाए सवाल
- सपा नेता अबू आजमी ने कहा-वंदे मातरम मुसलमान विरोधी नहीं, लेकिन उनकी धार्मिक मजबूरी है
- राष्ट्रीय युवा दिवस पर बोले यूपी के सीएम योगी- बल, बुद्धि होने के बाद भी भारत ने कभी किसी को गुलाम नहीं बनाया
- सीएम योगी का अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर निशाना, बिना नाम लिए कहा-देश में दो नमूने, एक दिल्ली में एक लखनऊ में
- यूपी के सीएम योगी ने जनता को लिखी चिट्ठी-रोहिंग्या और घुसपैठिए बर्दाश्त नहीं, इन्हें घर या व्यवसाय में काम पर नहीं रखें
0:00 left
लखनऊ। महाराष्ट्र के सपा विधायक अबू आजमी औरगंजेब की तारीफ करने के बाद चारों ओर से घिरते जा रहे हैं। महाराष्ट्र के नेताओं द्वारा आलोचना के बाद अब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उस कमबख्त को पार्टी से निकालो। उसको एक बार यूपी भेज दो, उपचार हम कर देंगे।
यूपी विधानमंडल के बजट सत्र के अंतिम दिन विधान परिषद् में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी औरंगजेब को आदर्श मान रही है। औरंगजेब का पिता शाहजहां अपनी जीवनी में लिखता है कि खुदा करे कि ऐसा कमबख्त किसी को पैदा न हो। उसने आगरा के किले में अपने बाप को कैद करके रखा। उस कमबख्त को पार्टी से निकालो।उसको एक बार यूपी भेज दो, उपचार हम कर देंगे। क्या उसको भारत के अंदर रहने का अधिकार होना चाहिए? समाजवादी पार्टी को इस पर जवाब देना चाहिए अबू आजमी को पार्टी से क्यों नहीं निकालते?
सीएम ने कहा कि समाजवादी पार्टी के मित्रों से कहना चाहता हूं कि भारत की विरासत पर आप गौरव की अनुभूति नहीं करते, कम से कम राम मनोहर लोहिया की बात मान लेते। उन्होंने कहा था कि भारत के एकात्मकता के तीन आधार हैं – भगवान राम, भगवान शिव और भगवान कृष्ण। लोहिया प्रखर समाजवादी थे। आज समाजवादी पार्टी लोहिया जी के विचारों से कितनी दूर जा चुकी है। आज भारत की विरासत को कोसना समाजवादी पार्टी का उद्देश्य हो गया है।
अबू आजमी ने की थी तारीफ
समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने मुगल शासक औरंगजेब की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि औरंगजेब इंसाफ पसंद बादशाह था। उसके कार्यकाल में ही भारत सोने की चिड़िया बना। मैं औरंगजेब को क्रूर शासक नहीं मानता हूं। औरंगजेब के समय में राजकाज की लड़ाई थी, धर्म की नहीं थी। आजमी ने उसे कुशल प्रशासक भी बताया था।



