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कूटनीति भी, जवाब भी तैयार: ईरान का अमेरिका को सख्त संदेश, परमाणु वार्ता पर सीमाएं तय
ईरान ने अमेरिका के साथ जारी परमाणु बातचीत के बीच स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि तेहरान कूटनीतिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी हमले की स्थिति में जवाब देने को पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी माना कि हाल की घटनाओं के कारण अमेरिका पर पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता।
अरागची ने कहा कि बातचीत ही स्थायी समाधान का रास्ता है, लेकिन पिछले साल जून में वार्ता के दौरान हुए हमले ने विश्वास को कमजोर किया। उनके मुताबिक सैन्य हमले और धमकियां किसी देश की तकनीकी प्रगति को नहीं रोक सकतीं। इसलिए तनाव के बावजूद कूटनीति जारी रहनी चाहिए।
ईरान ने दोहराया कि उसका यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और यह उसका संप्रभु अधिकार है। अरागची ने कहा कि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए 5 प्रतिशत से कम संवर्धन की जरूरत होती है, जबकि तेहरान रिसर्च रिएक्टर के लिए 20 प्रतिशत तक संवर्धन का ईंधन चाहिए, जिसका उपयोग कैंसर इलाज के लिए मेडिकल आइसोटोप बनाने में किया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रतिशत से ज्यादा अहम कार्यक्रम का उद्देश्य है, और ईरान इस बात की गारंटी देने को तैयार है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि वह सिर्फ परमाणु कार्यक्रम पर ही बातचीत करेगा। बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों के मुद्दे पर कोई चर्चा स्वीकार नहीं होगी। यह रुख इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मांगों से अलग है, जो चाहते हैं कि किसी भी संभावित समझौते में मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को भी शामिल किया जाए।
अरागची ने चेतावनी दी कि अगर वार्ता विफल होती है और नया हमला होता है तो ईरान जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा। उनका दावा है कि पिछले साल इजराइल और अमेरिका की बमबारी के बाद ईरान की सैन्य तैयारी संख्या और गुणवत्ता दोनों में मजबूत हुई है। उन्होंने नेतन्याहू पर युद्ध भड़काने का आरोप लगाते हुए कहा कि दोबारा हमला हुआ तो क्षेत्र में अमेरिकी ठिकाने भी निशाने पर आ सकते हैं।
ईरान के इस बयान से साफ है कि एक ओर कूटनीति की कोशिश जारी है, तो दूसरी ओर टकराव की आशंका भी बरकरार है।



