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भारत में कैंसर उपचार में बड़ी सफलता: 9 दिन में CAR-T थेरेपी से रक्त कैंसर खत्म, लागत में 90% तक की कमी
भारत के डॉक्टर्स ने रक्त कैंसर के इलाज में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने घोषणा की है कि डॉक्टरों ने महज 9 दिन में CAR-T सेल थेरेपी के जरिए रक्त कैंसर को खत्म कर दिया है। खास बात यह रही कि पहली बार CAR-T सेल्स को अस्पताल में ही तैयार कर मरीजों को दिया गया।

ICMR के अनुसार, यह ट्रायल दिखाता है कि कैंसर का इलाज अब सस्ता, तेज और मरीजों के अधिक करीब लाया जा सकता है। यह उपलब्धि ICMR और CMC वेल्लोर के सहयोग से किए गए क्लिनिकल ट्रायल ‘वेलकारटी’ के तहत हासिल हुई, जिसके परिणाम मोलिक्यूलर थेरेपी – ऑन्कोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
किन रोगियों पर हुआ परीक्षण?
डॉक्टरों ने इस थेरेपी को एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (ALL) और लार्ज बी-सेल लिम्फोमा (LBCL) से पीड़ित मरीजों पर आजमाया। ये दोनों रक्त कैंसर के गंभीर प्रकार हैं। प्रक्रिया के दौरान मरीज की अपनी टी-सेल्स को कैंसर से लड़ने के लिए तैयार किया गया।
उपचार की सफलता और निगरानी
ICMR के अनुसार:
- ALL के सभी मरीज पूरी तरह ठीक हो गए।
- LBCL के 50% मरीजों में कैंसर पूरी तरह समाप्त हो गया।
- कुल 80% मरीज 15 माह बाद भी कैंसर मुक्त पाए गए।
- थेरेपी के दौरान कुछ हल्के दुष्प्रभाव देखे गए, लेकिन कोई न्यूरो टॉक्सिसिटी (नर्वस सिस्टम पर असर) नहीं हुआ।
अस्पताल में ही तैयार की गई CAR-T सेल्स
CMC वेल्लोर के डॉक्टरों ने बताया कि CAR-T सेल्स को अस्पताल की स्वचालित मशीनों के जरिए महज 9 दिन में तैयार किया गया। वैश्विक स्तर पर इस प्रक्रिया में आमतौर पर करीब 40 दिन लगते हैं। भारत में ताज़ा कोशिकाओं के उपयोग से मरीजों की रिकवरी तेज़ रही।
लागत में भारी कमी
जहां वैश्विक स्तर पर CAR-T थेरेपी की लागत लगभग 3–4 करोड़ रुपये तक होती है, वहीं वेलकारटी मॉडल ने इसे 90% तक सस्ता कर दिया है, जिससे यह आम भारतीयों के लिए भी सुलभ हो सकता है। भारत में कैंसर का इलाज अब तक बेहद महंगा था और अधिकांश लोगों के पास बीमा भी नहीं होता, ऐसे में यह पहल एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है।
भारत का बायोथेरेपी में वैश्विक नेतृत्व
यह CAR-T थेरेपी भारत में पूरी तरह स्वदेशी स्तर पर विकसित की गई है। इससे पहले 2023 में इम्यूनो एक्ट और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई ने मिलकर पहली स्वदेशी CAR-T थेरेपी विकसित की थी जिसे सरकार की अनुमति भी मिल चुकी है।
ICMR का कहना है कि भारत में हर साल लगभग 50,000 नए ल्यूकेमिया मरीज सामने आते हैं। वेलकारटी मॉडल से इलाज को न सिर्फ सस्ता बनाया गया है बल्कि इसे तेज और अधिक सुलभ भी किया गया है, जो भविष्य में कैंसर के खिलाफ भारत की लड़ाई को नया आयाम देगा।



