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नई दिल्ली। मिडिल–ईस्ट में चल रहे संघर्ष की वजह से होने वाले मुद्दों पर नजर रखने के लिए केंद्र सरकार ने अंतर–मंत्रालयी समूह का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इस समूह में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ–साथ दूसरे मंत्रियों को शामिल किया गया है।
उल्लेखनीय है कि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और खासतौर पर तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्गों पर बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इसका प्रभाव भारत पर भी पड़ सकता है। इसी को देखते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए यह ग्रुप बनाया है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत और समन्वित कार्रवाई की जा सके। सरकार का उद्देश्य यह है कि किसी भी तरह की आपूर्ति बाधा या कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का असर आम लोगों और उद्योगों पर कम से कम पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा चलता है, तो तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ेगा। ऐसे में यह ग्रुप सरकार को समय–समय पर रणनीतिक फैसले लेने में मदद करेगा। इस समिति के गठन से पहले संसद में पश्चिम एशिया संकट पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे ग्रुप की चर्चा की थी।



