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संजय राउत का निशाना: सरकार के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का बहिष्कार करना चाहिए था – इंडिया गठबंधन को दी सलाह
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार के उस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की कड़ी आलोचना की, जिसे हाल ही में विदेशों में भारत की आतंकवाद विरोधी नीति को प्रस्तुत करने के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन “इंडिया” में शामिल दलों को इस प्रतिनिधिमंडल का बहिष्कार करना चाहिए था।
“सरकार के पापों का बचाव करेगा यह प्रतिनिधिमंडल” – राउत
राउत ने आरोप लगाया कि यह प्रतिनिधिमंडल वास्तव में सरकार द्वारा किए गए “पापों और अपराधों” का बचाव करने के लिए भेजा जा रहा है, न कि भारत की छवि को सुधारने के लिए। उन्होंने तीखे लहजे में कहा,ऐसे प्रतिनिधिमंडल को भेजने की कोई आवश्यकता नहीं थी, वह भी सरकार के खर्चे पर। विदेशों में हमारे पास पहले से राजदूत मौजूद हैं, वे अपना काम कर रहे हैं। इंडिया गठबंधन को इसका बहिष्कार करना चाहिए था।”
उन्होंने कहा कि विपक्ष इस प्रकार के कदमों से सरकार के बिछाए जाल में फंस रहा है और यह राष्ट्रहित नहीं बल्कि राजनीतिक बचाव का प्रयास है।
प्रतिनिधिमंडल के गठन पर उठाए सवाल
राउत ने शिवसेना (यूबीटी), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) जैसे दलों से सलाह लिए बिना ही निर्णय लेने पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे को प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सौंपा गया, जबकि शिवसेना (यूबीटी) के पास लोकसभा में पर्याप्त संख्या है और उसे भी यह अवसर मिलना चाहिए था। किस आधार पर इसे सर्वदलीय कहा जा रहा है?” – राउत ने पूछा।
ऑपरेशन सिंदूर और संसद सत्र पर सरकार को घेरा
संजय राउत ने यह भी कहा कि सरकार ने “ऑपरेशन सिंदूर” और पहलगाम हमले जैसे गंभीर मुद्दों पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की विपक्ष की मांग को अनदेखा कर दिया। इसके बजाय, प्रतिनिधिमंडल भेजकर इन मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।
अमेरिकी हस्तक्षेप और ट्रंप के बयान पर भी सवाल
राउत ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर भी सवाल उठाए जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच “परमाणु संघर्ष” को रोका था। ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने भारत से कहा कि यदि संघर्ष समाप्त होता है, तो अमेरिका उनके साथ “काफी व्यापार” करेगा।
इस पर राउत ने तंज कसते हुए पूछा कि,ट्रंप ने ऐसा कौन सा समझौता किया है जिसके तहत भारत जमीन, हवा और समुद्र पर सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हुआ है?”
विदेश यात्रा पर जा रहे प्रतिनिधि
इस पहल के तहत 51 राजनीतिक नेता, सांसद और पूर्व मंत्री सात प्रतिनिधिमंडलों में शामिल होकर 32 देशों और यूरोपीय संघ मुख्यालय (ब्रसेल्स) की यात्रा कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व कर रहे हैं:
- बैजयंत पांडा (बीजेपी)
- रविशंकर प्रसाद (बीजेपी)
- संजय कुमार झा (जेडीयू)
- श्रीकांत शिंदे (शिवसेना)
- शशि थरूर (कांग्रेस)
- कनिमोझी (डीएमके)
- सुप्रिया सुले (एनसीपी-एसपी)
इनमें 31 नेता एनडीए से और 20 गैर-एनडीए दलों से शामिल हैं।
राउत के इन बयानों ने एक बार फिर से विपक्ष और सरकार के बीच विदेश नीति और आतंकवाद पर राजनीतिक खींचतान को उजागर कर दिया है।



