राम मंदिर चंदे और दान पेटियों में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। अब शिवसेना (यूबीटी) सांसद Sanjay Raut ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए उसकी तुलना महमूद गजनवी से कर दी है। उनके इस बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र सामना में प्रकाशित संपादकीय में संजय राउत ने आरोप लगाया कि अयोध्या के राम मंदिर में दान, सोना, चांदी और आभूषणों की लूट हुई है। उन्होंने कहा कि कारसेवकों ने राम मंदिर के लिए अपना खून बहाया, लेकिन भाजपा ने उसी मंदिर को लूट लिया। राउत ने दावा किया कि जिस तरह महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को लूटा था, उसी तरह भाजपा ने राम मंदिर को नुकसान पहुंचाया है।
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संपादकीय में उन्होंने कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर राम मंदिर जैसी महत्वपूर्ण धार्मिक जगह सुरक्षित नहीं है, तो मंदिर विकास के दावे कैसे किए जा सकते हैं। उन्होंने कोल्हापुर के अंबाबाई मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां ऐसी घटनाएं नहीं हुईं।
संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में कई प्रमुख मंदिरों में हुई कथित गड़बड़ियों के जिम्मेदार लोग भाजपा के भीतर हैं। राउत ने कहा कि भाजपा दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने भीतर झांके।
गौरतलब है कि हाल ही में अमित शाह ने कोल्हापुर दौरे के दौरान मंदिर विकास और अंबाबाई मंदिर कॉरिडोर परियोजना को लेकर कई घोषणाएं की थीं। वहीं, राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर पहले भी Akhilesh Yadav और Arvind Kejriwal भाजपा को घेर चुके हैं।
अब सवाल यह है कि राम मंदिर चंदे को लेकर उठ रहे आरोपों और जांच के बीच क्या विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है?
आपकी राय क्या है? क्या यह गंभीर जवाबदेही का मामला है या फिर चुनावी राजनीति का नया मुद्दा? कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं।



