राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation Scam) मामले में गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दान और चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में सुरक्षा नियमों को कमजोर किए जाने का फायदा उठाकर कथित तौर पर चोरी और गबन को अंजाम दिया गया। जांच में कई प्रशासनिक खामियां, निगरानी में लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलताएं सामने आई हैं।
एसआईटी के मुताबिक, 6 फरवरी 2025 को गणना प्रक्रिया की निगरानी के लिए बनाई गई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में ऐसे बदलाव किए गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो गई। पहले जहां गणनाकर्मियों की अनिवार्य तलाशी का प्रावधान था, उसे बदलकर नियमित या रैंडम तलाशी कर दिया गया। जांच एजेंसी का मानना है कि आरोपियों ने इसी ढील का फायदा उठाकर कथित चोरी को अंजाम दिया।
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रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उपलब्ध CCTV फुटेज में गणनाकर्मियों द्वारा करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले नोट छिपाने की घटनाएं दर्ज हुई हैं। हालांकि 27 अप्रैल 2025 से पहले की अवधि का CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण उस दौरान हुए संभावित नुकसान का सटीक आकलन नहीं किया जा सका।
एसआईटी ने डॉ. अनिल मिश्रा को गणना प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी और पर्यवेक्षण में लापरवाही का प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माना है। वहीं रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की भूमिका को कथित चोरी और गबन में प्रमुख बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके पास मंदिर की विभिन्न हुंडियों की चाबियां थीं, जबकि इसके लिए कोई औपचारिक लिखित अनुमति नहीं थी। जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने अपने रिश्तेदार की गणना ड्यूटी में सिफारिश की, जिससे कथित अनियमितताओं का अवसर मिला।
एसआईटी ने गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव सहित कई अन्य पर्यवेक्षणीय अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट के आधार पर कुल आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की गई है। जांच एजेंसी ने ट्रस्ट, बैंक और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई स्तरों पर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की बात कही है।
हालांकि, इस प्रारंभिक रिपोर्ट में चंपत राय और गोपाल नगरकोटे का उल्लेख नहीं किया गया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें इस चरण में कोई राहत मिली है या विस्तृत जांच में उनकी भूमिका की अभी समीक्षा की जा रही है। एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारंभिक रिपोर्ट है और विस्तृत जांच अभी जारी है।
अब सबसे बड़ा सवाल…
क्या राम मंदिर जैसे अत्यंत संवेदनशील धार्मिक स्थल पर दान और चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल निगरानी के दायरे में लाया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की आशंका खत्म हो सके?
आपकी क्या राय है? क्या धार्मिक संस्थानों में चढ़ावे की गणना और प्रबंधन के लिए और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।



