भारत की सैन्य ताकत को नई ऊंचाई देने की दिशा में देश की रक्षा तकनीक ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पुणे स्थित रक्षा कंपनी निबे लिमिटेड ने दावा किया है कि उसकी स्वदेशी रूप से विकसित 100 किलोमीटर रेंज वाली ‘वायु अस्त्र’ लोइटरिंग म्यूनिशन प्रणाली का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। यह उपलब्धि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता और आधुनिक युद्ध तकनीक में बढ़ती ताकत का बड़ा संकेत मानी जा रही है।
कंपनी के अनुसार, इस अत्याधुनिक प्रणाली का ‘नो-कॉस्ट, नो-कमिटमेंट’ परीक्षण राजस्थान के पोखरण और उत्तराखंड के जोशीमठ के मलारी क्षेत्र में किया गया। इन दोनों इलाकों को कठिन भौगोलिक और सामरिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है, जहां प्रणाली की सटीकता, निगरानी क्षमता और लक्ष्य भेदन की ताकत का गहन आकलन किया गया।
👉 यह भी पढ़ें:
- भारत पर कमजोर मानसून का बड़ा संकट! 2009 के बाद सबसे कम बारिश का खतरा, फसलों और महंगाई पर असर संभव
- UPI के 10 साल पूरे: ₹314 लाख करोड़ के लेनदेन तक पहुंचा भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम
- सेमीफाइनल का सपना टूटा! ऑस्ट्रेलिया से 0-0 ड्रॉ के बाद महिला हॉकी वर्ल्ड कप से बाहर हुआ भारत
- मनुस्मृति पर राहुल गांधी के बयान से सियासत गरम, निशिकांत दुबे का पलटवार
- NTPC तालचेर पावर प्लांट में बड़ा हादसा: बंकर-बी में जोरदार धमाका, 5 श्रमिक गंभीर रूप से झुलसे
- स्वतंत्रता दिवस पर हॉकी टीम ने दिया जीत का तोहफा, वेल्स को 3-1 से हराया
‘वायु अस्त्र’ एक ऐसी आधुनिक प्रणाली है, जिसे दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने के लिए तैयार किया गया है। यह लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर लंबे समय तक मंडराते हुए सही समय पर हमला करने में सक्षम है। आधुनिक युद्ध में ऐसी प्रणालियां बेहद अहम मानी जाती हैं क्योंकि ये कम समय में बिना सैनिकों को जोखिम में डाले दुश्मन के ठिकानों को निशाना बना सकती हैं।
कंपनी ने दावा किया कि परीक्षण के दौरान प्रणाली ने लंबी दूरी तक उड़ान भरने, लक्ष्य की पहचान करने और सटीक प्रहार करने की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया। परीक्षण के नतीजों से यह संकेत मिला है कि यह प्रणाली भारतीय सशस्त्र बलों की निगरानी और हमलावर क्षमता को काफी मजबूत कर सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, 100 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाला यह स्वदेशी हथियार सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और दुर्गम इलाकों में सैन्य कार्रवाई के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। खासतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों और रेगिस्तानी इलाकों में इसकी तैनाती सेना को रणनीतिक बढ़त दे सकती है।
रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत लगातार विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने और घरेलू रक्षा उत्पादन को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। हाल के वर्षों में सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत कई भारतीय कंपनियां आधुनिक रक्षा उपकरण विकसित करने में जुटी हैं और ‘वायु अस्त्र’ उसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
यदि यह प्रणाली आगे के सभी परीक्षणों और सैन्य मानकों पर खरी उतरती है, तो आने वाले समय में इसे भारतीय सेना के विभिन्न अभियानों में शामिल किया जा सकता है। इससे भारत की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।



