थोड़ी तो शर्म करो जिम्मेदारों : पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रही जनता और आप बेच रहे हो पानी

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इंदौर। शहर इन दिनों भयंकर जलसंकट से जूझ रहा है। जनता पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है। हालत यह है कि नगर निगम और प्रशासन के लाख दावों के बावजूद बिना पैसे के लोगों को पानी नहीं मिल रहा। पानी के इस व्यापार से नेता से अधिकारी तक जुड़े हुए हैं। ऐसे में इंदौर की जनता कहां जाए?

हर साल होता है पानी का कारोबार

शहर में पानी का कारोबार लंबे समय से चला आ रहा है। टैंकर माफिया हर साल गर्मी का इंतजार करते हैं। इसकी तैयारी दिसंबर-जनवरी से ही शुरू हो जाती है। दूसरे शहरों के भंगार टैंकर खरीदे जाते हैं और उसे रंग-रोगन कर या तो नगर निगम में अटैच कर दिया जाता है या फिर निजी हाइड्रेंट में इस्तेमाल होता है।

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निगम के उपयंत्री के यहां मिला था हाईड्रेंट

पानी के इस कारोबार में नेता से लेकर नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं। कुछ साल पहले जब नगर निगम के एक उपयंत्री के यहां छापा मारा गया था, तो उनके घर पर निजी हाईड्रेंट मिला था। कई टैंकर खड़े मिले थे, जिन पर नगर निगम लिखा हुआ था। ये उपयंत्री लंबे समय तक जलकार्य विभाग से जुड़े थे। कई बार इन्हें वहां से हटाने का नाटक भी हुआ, लेकिन फिर वे जलकार्य विभाग में ही काबिज हो जाते थे। अगर ठीक से जांच की जाए तो ऐसे कई हाईड्रेंट और टैंकर मिल जाएंगे।

नि:शुल्क जल वितरण या मजाक

नगर निगम हर साल टैंकरों से जल वितरण पर नि:शुल्क जल वितरण के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करता है, लेकिन जनता को नि:शुल्क पानी नहीं मिलता। नगर निगम कंट्रोल रूम पर फोन लगाओ तो कोई जवाब नहीं मिलता। पार्षद को फोन लगाओ तो जवाब मिलता है कि टैंकर अभी नहीं है। विधायक को फोन लगाओ तो नगर निगम पर ठिकरा फोड़ देता है। चारों ओर से थकी जनता आखिर में निगम के टैंकर चालकों को ही पैसे देकर अपनी प्यास बुझाती है।

एक-दूसरे पर ढोल रहे जिम्मेदारी

इस बार तो इंदौर में अजीब ही स्थिति बन गई है। सारे जिम्मेदार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी ढोल रहे हैं। विधायक महेंद्र हार्डिया ने अपने क्षेत्र की समस्या उठाई तो महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पूर्व महापौरों पर जिम्मेदारी डाल दी। निगम के अधिकारियों से बात करो तो वे कर्मचारियों और पार्षदों को दोषी ठहरा देते हैं।

कड़ा एक्शन क्यों नहीं लेते?

इंदौर जैसे शहर में ऐसी स्थिति सिर्फ जिम्मेदारों के रवैये के कारण ही बनी है। छोटी-मोटी कार्रवाई हो रही है। कल ही निगमायुक्त ने पानी बेचते टैंकर पकड़ा था, लेकिन अब इससे कुछ नहीं होने वाला। पानी सिर के ऊपर से जा रहा है। चाहे नगर निगम हो या जिला प्रशासन पानी के मामले में अब सख्त एक्शन की जरूरत है। क्यों नहीं पानी माफियाओं पर कार्रवाई की जा रही? प्राइवेट टैंकर सप्लायर पर सख्ती क्यों नहीं हो रही? नगर निगम के जो टैंकर चालक, जलकार्य विभाग के कर्मचारी पानी से पैसे बना रहे हैं, उन पर लगाम क्यों नहीं कसी जा रही। अब समय आ गया है कि महापौर से लेकर वरिष्ठ अधिकारी तक एक्शन में आ जाएं, सिर्फ बैठकों से कुछ नहीं होने वाला।

Harish Fatehchandani
Harish Fatehchandanihttp://www.hbtvnews.com
Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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