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नई दिल्ली। विदेश मंत्री जयशंकर राज्यसभा में मिडिल ईस्ट के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वहां हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, हम वहां पर भारतीयों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। आर्मेनिया के रास्ते भारतीयों को निकाला जा रहा। इस क्षेत्र में भारतीय एंबेसी लगातार लोगों तक जरूरी मदद पहुंचा रही है।
आज संसद के बजट सत्र में दूसरे फेज के पहले दिन पश्चिम एशिया का मुद्दा उठा। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में सदन के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि नियम 176 के तहत, मैं पश्चिम एशिया में बदलते जियोपॉलिटिकल हालात को देखते हुए भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए उभरती चुनौतियों के मुद्दे पर चर्चा की इजाजत मांगता हूं।
विदेश मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया था। हम अब भी मानते हैं कि तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लेना चाहिए। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उभरते घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहे हैं। संबंधित मंत्रालय भी प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि यह निरंतर संघर्ष भारत के लिए विशेष रूप से चिंता का विषय है। हम एक पड़ोसी क्षेत्र हैं और मिडिल ईस्ट की स्थिरता हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार कच्चे तेल की आपूर्ति और क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति काफी खराब हुई है। ऐसे में सरकार घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रही है। वहीं सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसी वजह से क्रूड ऑयल की स्थिति पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ सप्लाई प्रभावित हुई है, लेकिन इस पर कंट्रोल है।



