बिहार में इस बार चौंका नहीं पाई भाजपा, पहले से तय नाम सम्राट चौधरी के नाम पर लगी मुहर, शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में चुने गए विधायक दल के नेता

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पटना। बिहार में इस बार भाजपा ने कोई चौंकाने वाला काम नहीं किया। विधायक दल की बैठक में सीएम पद की रेस में सबसे आगे रहने वाले नाम सम्राट चौधरी पर मुहर लगा दी गई। अब सम्राट ही बिहार के नए सम्राट होंगे।

उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार ने मंगलवार को अपने कैबिनेट की आखिरी बैठक की। इसके बाद राज्यपाल से मिलकर उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद भाजपा विधायक दल की बैठक हुई। भाजपा ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा था। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, बीएल संतोष, विनोद तावड़े जैसे नेता भी बैठक में मौजूद थे।

राजद से शुरू की थी राजनीति की शुरुआत

स्रमाट चौधरी ने राजनीति की शुरुआत लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद से शुरू की थी। वे बिहार विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता रह चुके हैं। वर्तमान में उपमुख्यमंत्री हैं और गृह विभाग की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास है। उन्होंने बिहार में भाजपा की प्रदेश कमान भी संभाली है।  वे मुंगेर जिले से आते हैं। 57 वर्षीय सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापकों में से एक रहे हैं। वे खुद भी सांसद और विधायक रहे थे। शकुनी चौधरी को लालू यादव का खास माना जाता था।

राबड़ी सरकार में कृषि मंत्री बने

वर्ष 1990 में सम्राट चौधरी सक्रिय राजनीति में आए। 1999 में वे राबड़ी देवी की सरकार में कृषि मंत्री रह चुके हैं। 2005 में आरजेडी के सत्ता से बेदखल होने के बाद भी वे काफी समय तक पार्टी के साथ बने रहे।  वर्ष 2000 और 2010 में वो परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। 2014 में वे जेडीयू में आए और जीतन राम मांझी की सरकार में मंत्री  बने। इसके बाद साल 2018 में वे राजद  छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। तब से उनका सफर लगातार जारी है और अब डिप्टी सीएम से सीएम बनने जा रहे हैं।

इस बार पार्टी ने सुनी जनता की आवाज

बिहार के राजनीति के जानकारों का कहना है कि पहली बार भाजपा ने अपन मत नहीं थोपते हुए जनता की आवाज सुनी है। जब से नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने की चर्चा शुरू हुई, तब से सम्राट चौधरी का नाम सीएम पद की रेस में सबसे आगे था। इसके बावजूद बिहार भाजपा के नेताओं को ही भरोसा नहीं था कि पता नहीं पार्टी आलाकमान किसके नाम की पर्ची भेज दे। इस बार भाजपा ने चौंकाने वाला कोई काम नहीं किया।

Harish Fatehchandani
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