अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अब संघर्ष खत्म करने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि ईरान इस समय “ताकत और सम्मान” की स्थिति में है और ऐसे में युद्ध को समाप्त करना बेहतर होगा। हालांकि, दोनों देशों के बीच राजनयिक बातचीत अभी भी ठप है।
पेजेश्कियान बोले- ईरान मजबूत स्थिति में
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पेजेश्कियान ने दावा किया कि दुनिया ईरान की स्थिति और उसके “प्रतिरोध” को स्वीकार कर रही है। उन्होंने अमेरिका पर ईरान के स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया और कहा कि वॉशिंगटन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है।
ईरानी राष्ट्रपति ने जून में अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन का भी बचाव किया। ईरान के कट्टरपंथी नेताओं की ओर से सरकार पर अमेरिका को रियायतें देने के आरोपों के बीच उन्होंने कहा कि समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसे आत्मसमर्पण माना जा सके।
हालांकि, ईरान की विदेश और सुरक्षा नीति में अंतिम निर्णय सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के हाथों में है।
ईरानी सेना ने दी कड़े जवाब की चेतावनी
युद्ध खत्म करने की अपील के बीच ईरानी सैन्य नेतृत्व ने किसी नए खतरे की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही के मुताबिक, ईरान की थल, नौसेना, वायुसेना, वायु रक्षा और साइबर क्षमताएं पूरी तरह तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि नए खतरे की स्थिति में ईरान की सेना “कड़ा और विनाशकारी” जवाब देने में सक्षम है।

होर्मुज पर बढ़ा तनाव
इस बीच ओमान और ईरान के विदेश मंत्रियों ने फोन पर बातचीत की। दोनों ने बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए जरूरी परिस्थितियां बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन से जुड़े घटनाक्रम पर चर्चा की।
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल की कीमतों, शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ट्रंप का रुख अभी भी सख्त
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की बातचीत की इच्छा पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन अभी “सही समझौते” के लिए तैयार नहीं है।
ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि ईरान की मदद करने वाले देशों को आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
क्या पेजेश्कियान का युद्ध खत्म करने का बयान अमेरिका-ईरान तनाव में शांति की नई उम्मीद है, या यह सिर्फ रणनीतिक कदम है? क्या दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत शुरू होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



