इंदौर। डायमंड गृह निर्माण संस्था की जमीन को लेकर अब सहकारिता विभाग पूरी तरह भूमाफिया की मदद पर उतर आया है। पुलिस पिटाई कांड के बाद जब इसकी फाइलें खुलने लगी तो सहकारिता निरीक्षक संजय कूचनकर और आशीष सेठिया इस मामले को उलझाने में लग गए हैं। वे गलत जानकारी देकर सरकारी विभागों को भ्रमित कर रहे हैं।
हाजियों ने 1974 में खरीदी थी जमीन
उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले डायमंड कॉलोनी की जमीन के विवाद में दो पुलिसकर्मियों की पिटाई के बाद इसकी जांच-पड़ताल शुरू हुई है। बताया जाता है कि 11 हाजियों ने 1974 में खजराना के ही किसान परिवार शालीग्राम और गणेश से 25 एकड़ जमीन खरीदी। इसके बाद 1994 में इसमें से लगभग 13 एकड़ जमीन 35 लाख रुपए में डायमंड गृह निर्माण को बेच दी। इसी में से 7 एकड़ जमीन संयम इन्फ्रा सहित अन्य ने खरीदी।
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फर्जी केस दर्ज कर चला था मुकदमा
2007 में हबीब दादा से एक फर्जी एफआईआर खजराना थाने पर करवाई गई, जिसमें आरोप लगाया कि पॉवर ऑफ अटार्नी होल्डर शेख इब्राहिम ने कूटरचित और फर्जी तरीके से डायमंड गृह निर्माण को जमीन बेची। इस एफआईआर के आधार पर पुलिस ने किशनलाल सहित संस्था के शेख मुश्ताख और उसके तीन भाइयों और नाबालिग बच्चों सहित आठ लोगों को आरोपी बना लिया था।
एफआईआर के आधार पर कब्जे का खेल
बताया जाता है कि 2012 में इसी एफआईआर के आधार पर कोर्ट को गुमराह कर संस्था की रजिस्ट्री और पॉवर ऑफ अटार्नी को शून्य घोषित करवा दिया। इसी आधार पर भूमाफियाओ ने सहकारिता विभाग के माध्यम से संस्था को परिसमापन में लेने और आवंटित किए गए भूखंडों को भी अवैध बताकर बने मकानों को खाली कराने का काम शुरू हुआ। 2014 में संयम इन्फ्रा ने भी अपनी सात एकड़ जमीन से कब्जे हटाने शुरू किए। इसको लेकर कई बार विवाद भी हुए। इसके बाद से यह मामला विवादों में चल रहा है। पिछले दिनों इसी जमीन को लेकर पुलिसकर्मियों की पिटाई हुई थी।
2024 में ही खत्म हो गया था मामला
उल्लेखनीय है कि हाजी एंड कंपनी की जमीन से जुड़े फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी और प्लॉट बिक्री मामले में दशम अपर सत्र न्यायालय ने 20 दिसंबर 2024 को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए चारों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। यह मामला इंदौर के कनाड़िया रोड स्थित ग्राम खजराना की सर्वे नंबर 1105 एवं 1105/1528 की लगभग 4.281 हेक्टेयर (करीब 10.58 एकड़) भूमि से जुड़ा था। शिकायत के अनुसार यह जमीन हाजी एंड कंपनी की थी, जिसे वर्ष 1994 के बाद कथित रूप से फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर निजी लोगों को बेचने और प्लॉट काटने का आरोप लगाया गया। इस मामले में वर्ष 2007 में कनाड़िया थाना पुलिस ने एफआईआर क्रमांक 627/2007 दर्ज की थी। इसके बाद लंबी जांच और सुनवाई चली।
कूचनकर और सेठिया इसी विवाद की दे रहे जानकारी
सूत्र बताते हैं कि डायमंड कॉलोनी की जमीन के मामले में सहकारिता निरीक्षक संजय कूचनकर और आशीष सेठिया इसी पुराने विवाद की जानकारी देकर सभी को भ्रमित कर रहे हैं। जब कोई विवाद बचा ही नहीं तो फिर सहकारिता विभाग इसकी चर्चा ही क्यों कर रहा है।
ट्रांसफर के खिलाफ हाईकोर्ट में कूचनकर
उल्लेखनीय है कि संजय कूचनकर का दूसरी बार जबलपुर ट्रांसफर हो गया है, लेकिन उन्होंने हाईकोर्ट में अपील कर रखी है। इसी के आधार पर वे इंदौर में फिर से टिक गए हैं और भूमाफियाओं की पूरी मदद कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि डायमंड कॉलोनी के मामले में वे आशीष सेठिया के साथ मिलकर पूरा मामला फिर से उलझाने में जुट गए है।



