भारत-पाकिस्तान संबंधों के बीच एक बार फिर तीखा संदेश सामने आया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पूरी तरह बंद नहीं होता, तब तक सिंधु नदी का पानी आतंकवाद को संरक्षण देने वालों तक नहीं पहुंचने दिया जाएगा।
हैदराबाद में आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने साफ कहा कि भारत शांति और सद्भाव की भाषा को समझता है, लेकिन जो लोग आतंकवाद और हिंसा का रास्ता चुनते हैं, उन्हें जवाब देना भी जानता है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि देश अपनी सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने में सक्षम है।
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राजनाथ सिंह ने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि उसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित कर स्पष्ट संदेश दिया था कि जिनके हाथ आतंकवाद से जुड़े हैं, उन्हें भारत से किसी प्रकार की रियायत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम सिंधु नदी का पानी आतंकवादियों और मानवता के दुश्मनों के संरक्षकों तक नहीं पहुंचने देंगे।” यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा है।
रक्षा मंत्री का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस चर्चित संदेश की भी याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” माना जा रहा है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को और सख्त करने के संकेत दे रहा है।
राजनीतिक और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल संधि पर भारत का रुख दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। वहीं पाकिस्तान की ओर से इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या आतंकवाद के खिलाफ दबाव बनाने के लिए सिंधु जल संधि को निलंबित रखना सही रणनीति है? या इससे भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव और बढ़ सकता है?
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