नई दिल्ली। असम विधानसभा ने बुधवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल पास कर दिया। इस पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश बताया। इधर, सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि यूसीसी की मांग सबसे पहले कांग्रेस ने ही उठाई थी।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह मुसलमानों पर पिछले दरवाजे से हिंदू कानून थोपने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि उत्तराधिकार, संपत्ति बंटवारे और तलाक जैसे मामलों में हिंदू सिद्धांत लागू किए जा रहे हैं, जबकि इसे “समान कानून” बताया जा रहा है। ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि केवल हिंदू संस्कृति की रक्षा की जा रही है, जबकि मुसलमानों को इन नियमों का पालन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ओवैसी ने इससे पहले भी इस कानून का विरोध किया था।
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सीएम सरमा बोले-हर धर्म को बराबरी का हक
यूसीसी बिल पास होने के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि आज असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता बिल पास होने के साथ ही यहां रहने वाले हर धर्म के लोगों को नागरिक मामलों में कानून के सामने बराबरी का अधिकार मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि असम ऐसे सुधारों के साथ आगे बढ़ना जारी रखेगा जो समाज को मजबूत करते हों, महिलाओं को न्याय दिलाते हों, परिवारों की सुरक्षा करते हों और समुदायों के बीच आपसी एकता को बढ़ावा देते हों।
सीएम ने कहा-कांग्रेस ने उठाई थी मांग
असम विधानसभा में यूसीसी पर पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि 1925 में सबसे पहले कांग्रेस ने ही यूसीसी की मांग उठाई थी और 1937 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी इसका समर्थन किया था। सरमा ने आरोप लगाया कि अब कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष पार्टी नहीं रह गई है और केवल “एक विशेष समुदाय” का प्रतिनिधित्व कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यूसीसी का विरोध संविधान या जनजातीय परंपराओं के आधार पर नहीं, बल्कि “कुरान और शरीयत” के नजरिए से कर रही है।



