प्रधानमंत्री मोदी जी,
मिडिल ईस्ट संकट को देखते हुए आपने आम जनता से पेट्रोल-डीजल गैस की बचत करने की अपील की है. काफी अच्छा लगा, आप इस संकट पर खुलकर तो बोले.
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देश की जनता आपकी कोई बात नहीं टालती, उसने आपकी अपील पर अमल भी शुरू कर दिया है. लेकिन, यही जनता आपके मंत्री-संत्री और नेताओं को सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ जब धूल उड़ाती देखती है तो उसका माथा सनक जाता है.
विडंबना यह कि कई-कई गाड़ियों में तो सिर्फ ड्राइवर या एकाध चमचे ही बैठे होते हैं. मंत्री से लेकर निगम-मंडल के अध्यक्ष तक 20-25 गाड़ियों का काफिला जुटा ही लेते हैं. अगर काफिला सीएम का हो तब तक गाड़ियों की संख्या 100-200 पार हो जाती है.
क्या आपको नहीं लगता कि इसमें पेट्रोल-डीजल बर्बाद हो रहा है. फिर आप सारी उम्मीदें जनता से ही क्यों रखते? वह भी उस जनता से जो बिना जरूरत घर से अपना दोपहिया भी बाहर नहीं निकालती.
जितना बड़ा काफिला, उतना बड़ा नेता. आज आपकी पार्टी के अधिकांश नेताओं की मानसिकता यही है.
मोदीजी, संकट की इस घड़ी में एक अपील अपने नेताओं से भी कर लीजिए.
आपकी बात भला कौन नहीं मानेगा. जनता का क्या है- जब कहोगे लाइन में लग जाएगी. थाली, चम्मच, कटोरी तो आप बजवा ही चुके हैं…



