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इंदौर। प्रशासन के दबाव के बाद देवी अहिल्या संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा ने गुरुवार को संचालक मंडल की बैठक बुलाकर इस्तीफे का ड्रामा किया। संचालक मंडल के 9 में से 6 सदस्यों के उपस्थित होने के बाद भी यह कहकर कि सारे लोग नहीं आए हैं, इस्तीफा नहीं दिया। शुक्रवार को अजमेरा ने सुबह 10 बजे फिर से संचालक मंडल की बैठक बुलाई है।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि जब आप इस्तीफा देने चाहते हो तो आज ही दे दो, लेकिन अजमेरा ने कहा कि कल दूंगा। इसका कारण अजमेरा के खासमखास उपाध्यक्ष मनोज काला और दो अन्य सदस्यों का उपस्थित नहीं होना है। सदस्यों से अजमेरा ने कहा कि मैं इस्तीफा देने के बाद भी संचालक बना रहूंगा। सदस्यों ने कहा कि जब आप बीमारी के कारण इस्तीफा दे रहे हो तो आराम करो, लेकिन अजमेरा नहीं माने।
डमी बिठाना चाहते हैं अजमेरा
सदस्यों ने बैठक में यह भी कहा कि कभी भी मीटिंग बुलाई जाएगी तो सारे सदस्य नहीं आएंगे। आज जब छह सदस्य हैं, तो आज ही इस्तीफा देकर सारे डाक्यूमेंट हमें सौंप दो, लेकिन अजमेरा इसके लिए तैयार नहीं हुए। अजमेरा ने कहा कि कल सुबह फिर से मीटिंग होगी और उसी में तय करेंगे कि अध्यक्ष कौन होगा? दरअसल इतनी गड़बड़ियों और आरोपों के बावजूद भी अजमेरा का संस्था से मोहभंग नहीं हो रहा है। उनकी कोशिश है कि अपनी जगह किसी डमी को बिठाकर फिर संस्था में मनमाने खेल करते रहें।
लंबे समय से फाइनल नहीं कर रहे सूची
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेश पर कलेक्टर द्वारा गठित कमेटी ने अयोध्यापुरी और महालक्ष्मीनगर के पात्र प्लॉटधारकों की सूची तैयार कर संस्था को भेज दी थी। इसमें अयोध्यापुरी के 400 सदस्यों के नाम विभाग ने भेजे थे, जिसे विमल अजमेरा और उनके संचालक मंडल को वेरिफाई कर भेजना थे। अब परेशानी यह है कि अजमेरा ने भूमाफियाओं के साथ मिलकर 516 सदस्यों की सूची बना ली थी।
कलेक्टर की डांट के बाद डरे अजमेरा
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर आशीष सिंह ने रविवार को हुई बैठक में देवी अहिल्या संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा को अंतिम चेतावनी दी थी। कलेक्टर ने कहा था कि हमने जो आपकी लिस्ट भेजी है उसके आधार पर लिस्ट बनाने को कहा है। 15 दिन में दे रहे हो कि कौन पात्र है। अगर नहीं देते तब मैं समझ लूंगा कि आप लोग नहीं करना चाहते। तब मैं एफआईआर तक की कार्रवाई करूंगा। कलेक्टर की चेतावनी से अजमेरा डर गए हैं और अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना चाहते हैं, लेकिन साथ में उनकी कोशिश यह भी है कि संस्था पर उनका कब्जा बना रहे।



