मध्य प्रदेश सरकार ने बालाघाट के बीमारी प्रभावित क्षेत्रों में मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने का बड़ा निर्णय लिया है। दरअसल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29 अगस्त को बालाघाट जिले का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जन-विश्वास अभियान के तहत आदिवासी परिवारों से सीधा संवाद साधा।
पीड़ितों से मिले मुख्यमंत्री, मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता का ऐलान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बैहर और बिरसा ब्लॉक के सुदूर आदिवासी गांवों में पहुंचे। उन्होंने ग्राम बोंदारी, कोरका और देवरबेली में पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गंभीर बीमारियों से जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को दो-दो लाख रुपये देने की घोषणा की।
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इसके अलावा उन्होंने पीड़ित परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। वहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि दुख की इस घड़ी में राज्य सरकार पूरी तरह से प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है।

पूर्व नक्सल प्रभावित 100 गांवों के लिए 225 करोड़ का बजट
मुख्यमंत्री ने जिले के विकास के लिए 225 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा की। दरअसल यह राशि पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे 100 गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर खर्च होगी।
इसके बाद इन दूरदराज के क्षेत्रों में पक्की सड़कों, निर्बाध बिजली और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों की दशा सुधारने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएंगे। नतीजतन इन आदिवासी अंचलों को विकास की मुख्यधारा से मजबूती से जोड़ा जा सकेगा।
स्वास्थ्य संकट के बीच मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता और जांच के निर्देश
गौरतलब है कि बैगा बहुल इलाकों में पिछले कुछ समय से अज्ञात बीमारी और मलेरिया का प्रकोप देखा गया। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बीमारी के मूल कारणों की गहराई से जांच करने के कड़े निर्देश दिए।
इस बीच प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं:
- प्रभावित गांवों में नियमित रूप से डॉक्टरों की विशेष टीमें तैनात रहेंगी।
- ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल और जरूरी पोषण सामग्री तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी।
- स्वास्थ्य केंद्रों में मलेरिया और मौसमी बीमारियों की दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रहेगा।

बैगा विकास प्राधिकरण के गठन और आश्रमों के विस्तार पर जोर
बहरहाल राज्य सरकार ने बैगा जनजाति के समग्र विकास के लिए सुनियोजित योजना तैयार की है। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में बैगा विकास प्राधिकरण के गठन का महत्वपूर्ण ऐलान किया।
इसके अलावा आदिवासी बच्चों को बेहतर शिक्षा से जोड़ने के लिए बैगा आश्रमों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसलिए सरकार इन क्षेत्रों में शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े ढांचागत विकास पर विशेष ध्यान दे रही है।
पशुपालन, होम-स्टे और ट्राइबल टूरिज्म से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट की प्राकृतिक सुंदरता चेरापूंजी से भी अधिक भव्य है। इसलिए यहां इको टूरिज्म और ट्राइबल टूरिज्म को बढ़ावा देने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुधार के लिए बकरी पालन, मुर्गी पालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को होम-स्टे के माध्यम से स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे।



