पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के किराना हिल्स को लेकर चल रहे सबसे बड़े सवाल पर अहम जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेनाओं ने किराना हिल्स को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया था, लेकिन वहां भारतीय ड्रोन के गिरने की संभावना से इनकार नहीं किया।

जनरल चौहान के मुताबिक, भारतीय सेनाओं ने सरगोधा और उसके आसपास पाकिस्तानी रडार की तलाश के लिए कई loitering munitions यानी आत्मघाती ड्रोन भेजे थे। किराना हिल्स सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। इन ड्रोन की उड़ान क्षमता सीमित थी और वे लगभग दो घंटे तक लक्ष्य की तलाश कर सकते थे। अगर इस दौरान कोई लक्ष्य नहीं मिलता, तो ड्रोन नीचे आकर कहीं टकरा सकता था। चौहान के अनुसार, संभव है कि ऐसा ही एक ड्रोन किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकराया हो।
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यह बयान उस समय के वायु संचालन महानिदेशक एयर मार्शल ए.के. भारती के बयान को भी स्पष्ट करता है। उन्होंने मई 2025 में कहा था कि भारत ने किराना हिल्स को लक्ष्य नहीं बनाया था। चौहान ने उनके बयान को सही बताया है।
जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण खुलासे भी किए। उन्होंने बताया कि 29 अप्रैल 2025 की अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, NSA अजीत डोभाल और तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद थे। इसी दौरान पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई के विकल्पों पर अंतिम रणनीतिक फैसले लिए गए। बहावलपुर को भी संभावित लक्ष्य सूची में शामिल किया गया था और नागरिकों को कम से कम नुकसान पहुंचाने के लिए रात में कार्रवाई की रणनीति बनाई गई थी।



