देशभर में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की तेज रफ्तार और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर भारत, पूर्वोत्तर, पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मौसम विभाग (IMD) ने अगले कई दिनों तक Heavy Rainfall Alert, तेज हवाओं और वज्रपात की चेतावनी जारी की है।
पिछले 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर से लेकर तटीय कर्नाटक तक मौसम का रौद्र रूप देखने को मिला। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई। कई क्षेत्रों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली।
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सबसे दर्दनाक तस्वीर बिहार से सामने आई, जहां बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में 10 लोगों की मौत हो गई। वहीं पंजाब में भी बारिश से जुड़ी घटनाओं में 3 लोगों की जान चली गई। मौसम विभाग का कहना है कि यह अस्थिर मौसम कम से कम 18 जून तक जारी रह सकता है।
हिमाचल प्रदेश में रोहतांग सहित ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि केरल में कुछ इलाकों में 20 सेंटीमीटर तक बारिश रिकॉर्ड हुई। असम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भी भारी वर्षा का दौर जारी है। उत्तराखंड में भूस्खलन के कारण बदरीनाथ हाईवे कई घंटों तक बंद रहा, जिससे करीब 2,000 तीर्थयात्री रास्ते में फंस गए।
इस बीच मानसून ने भी तेजी दिखाई है। तीन दिन की देरी से केरल पहुंचने वाला मानसून मात्र नौ दिनों में 19 राज्यों तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 2-3 दिनों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के और हिस्सों में मानसून आगे बढ़ सकता है।
लेकिन राहत की इस बारिश के बीच एक नई चिंता भी सामने आई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में El Nino (अल नीनो) की स्थितियां फिर से सक्रिय हो रही हैं। समुद्र की सतह के बढ़ते तापमान का असर अब वायुमंडल पर भी दिखने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो और मजबूत हुआ, तो आने वाले महीनों में मानसून प्रभावित हो सकता है और कई इलाकों में कम बारिश या सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
यानी फिलहाल देश में बारिश का दौर जारी है, लेकिन भविष्य का मौसम अब भी अनिश्चितताओं से घिरा हुआ है। एक तरफ बाढ़ और वज्रपात का खतरा है, तो दूसरी तरफ अल नीनो के कारण सूखे की आशंका भी मंडरा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या इस बार मानसून देश के लिए राहत लेकर आएगा या अल नीनो पूरे सीजन का गणित बिगाड़ देगा? क्या बदलते मौसम पैटर्न जलवायु संकट का बड़ा संकेत हैं?



