पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद देश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर आम जनता पर महंगाई का बोझ डालने और सच्चाई छिपाने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार समर्थक नेताओं ने वैश्विक संकट और युद्ध जैसे हालात को इसकी मुख्य वजह बताया है।
पूर्व पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता के सामने पूरी सच्चाई नहीं रखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने तथ्य छिपाए और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर पारदर्शिता नहीं दिखाई। उनका कहना था कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि आखिर अचानक कीमतें बढ़ाने की नौबत क्यों आई।
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समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी सरकार पर तंज कसा। उन्होंने सोशक मीडिया पर लिखा, “अगर आगे बढ़ना है तो अब साइकिल ही सबसे बड़ा सहारा है।” उनके इस बयान को बढ़ती महंगाई और ईंधन संकट पर सरकार की आलोचना के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों से दुनिया युद्ध जैसे हालात से गुजर रही है। कई देशों में आर्थिक संकट पैदा हुए हैं, लेकिन भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालात को नियंत्रण में रखा। उन्होंने कहा कि अभी केवल गैस और ईंधन की कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की गई है।
दिलीप घोष ने यह भी कहा कि लंबे समय से संकेत मिल रहे थे कि तेल के दाम बढ़ सकते हैं, क्योंकि तेल कंपनियों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा था। उनके अनुसार सरकार ने जितनी न्यूनतम बढ़ोतरी संभव थी, उतनी ही की है ताकि जनता पर अतिरिक्त बोझ कम पड़े।
इस बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पुरानी चेतावनी भी चर्चा में आ गई है। राहुल गांधी ने पहले ही कहा था कि विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है। अब कीमतें बढ़ने के बाद विपक्ष इसे सरकार की सोची-समझी रणनीति बता रहा है।
ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। आम जनता को डर है कि पेट्रोल और डीजल महंगे होने से परिवहन खर्च बढ़ेगा, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई देगा।



