रीवा। मध्य प्रदेश की रीवा लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद जनार्दन मिश्रा अपने एक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। कोलकाता-रीवा-भोपाल हवाई सेवा के लोकार्पण कार्यक्रम में जनता को संबोधित करते हुए सांसद ने देश में पेट्रोल की उपलब्धता, कच्चे तेल के आयात और इथेनॉल मिश्रण को लेकर अपनी बात रखी। इसी दौरान उन्होंने शुद्ध पेट्रोल को लेकर ऐसा सवाल किया, जिसका वीडियो अब चर्चा का विषय बन गया है।
मंच से बोलते हुए जनार्दन मिश्रा ने कहा कि भारत में जरूरत के मुकाबले बहुत कम मात्रा में तेल का उत्पादन होता है और बड़ी मात्रा में तेल विदेशों से आयात करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब देश में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध ही नहीं है तो लोगों को शुद्ध पेट्रोल कहां से दिया जाएगा। इसी क्रम में उन्होंने तीखे अंदाज में सवाल किया—“शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के यहां से आएगा क्या?”
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सांसद का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर वाहन चालकों और वाहन विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय सामने आती रही है। एक तरफ सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने को ऊर्जा सुरक्षा, आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार से जोड़कर देखती है, वहीं दूसरी तरफ कुछ वाहन मालिक पुराने वाहनों के इंजन पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर करते हैं।
“80 फीसदी तेल विदेश से लेना पड़ता है”
जनार्दन मिश्रा ने अपने भाषण में दावा किया कि भारत में करीब 20 प्रतिशत तेल ही उपलब्ध होता है, जबकि लगभग 80 प्रतिशत जरूरत के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि समुद्री मार्गों में परेशानी के कारण तेल को लंबा रास्ता तय करके भारत तक लाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय हालात में भारत के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देना जरूरी है। सांसद ने इथेनॉल के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इथेनॉल का उत्पादन नहीं किया जाएगा तो देश पेट्रोल और डीजल की जरूरत कैसे पूरी करेगा।

ब्राजील का उदाहरण देकर इथेनॉल का समर्थन
भाजपा सांसद ने अपने भाषण में ब्राजील का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि ब्राजील में बड़े स्तर पर इथेनॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है और वहां वाहन इथेनॉल आधारित ईंधन पर चल रहे हैं। उनका कहना था कि भारतीय वाहनों में भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल करने की क्षमता है।
उन्होंने कहा कि वाहन निर्माता कंपनियां भी इस दिशा में काम कर रही हैं और यदि वाहनों की तकनीक के अनुरूप ईंधन का इस्तेमाल किया जाए तो इथेनॉल को लेकर समस्या नहीं होनी चाहिए। सांसद के अनुसार देश में इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
भारत में इथेनॉल मिश्रण पर क्यों है बहस?
पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति को लेकर देश में लंबे समय से चर्चा होती रही है। सरकार का तर्क है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा में कमी आ सकती है। साथ ही गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से इथेनॉल तैयार होने के कारण किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार उपलब्ध हो सकता है।
हालांकि, वाहन मालिकों का एक वर्ग इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर अलग राय रखता है। विशेष रूप से पुराने वाहनों के इंजन, ईंधन दक्षता और वाहन के रखरखाव पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। यही वजह है कि “शुद्ध पेट्रोल बनाम इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल” की बहस समय-समय पर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर तेज हो जाती है।
जनार्दन मिश्रा का बयान इसी बहस के बीच सामने आया है। उनके बयान का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है और लोग इसे लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हालांकि, सांसद के पूरे भाषण का संदर्भ देखने पर स्पष्ट होता है कि वह मुख्य रूप से भारत की तेल आयात निर्भरता और इथेनॉल को वैकल्पिक ईंधन के रूप में बढ़ावा देने की बात कर रहे थे।
बयान पर अब जनता की नजर
सांसद का बयान राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है, लेकिन इसके पीछे उठाया गया मूल सवाल भी महत्वपूर्ण है—जब भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, तब ऊर्जा सुरक्षा के लिए देश को किन विकल्पों पर आगे बढ़ना चाहिए?
क्या पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण भारत की तेल आयात निर्भरता कम करने का बेहतर रास्ता है? क्या पुराने वाहनों के मालिकों के लिए अलग विकल्प उपलब्ध होना चाहिए? और क्या सरकार को इथेनॉल नीति लागू करने से पहले उपभोक्ताओं को इसके फायदे और संभावित प्रभावों की स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए?
अब जनार्दन मिश्रा के बयान के बाद यह बहस फिर तेज हो गई है।
आपकी राय क्या है?
क्या भारत को इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देना चाहिए या लोगों को शुद्ध पेट्रोल का विकल्प भी मिलना चाहिए? क्या सांसद का बयान सही संदर्भ में दिया गया था या उनकी भाषा आपत्तिजनक थी? अपनी राय नीचे टिप्पणी में जरूर लिखें और बताएं कि आप किस ईंधन को बेहतर विकल्प मानते हैं।



