रतलाम में सूखे का संकट गहराता जा रहा है क्योंकि इस वर्ष यहां सामान्य 35.15 इंच बारिश की जगह केवल 23 इंच ही बारिश दर्ज की गई है। इस कम वर्षा के चलते जिले में जल संकट और कृषि प्रभावित हो रही है।
रतलाम जिले में बारिश में भारी गिरावट से समस्या बढ़ी
अल नीनो के प्रभाव के कारण इस मानसून सीजन में रतलाम जिले में वर्षा सामान्य से काफी कम हुई है। पिछले वर्ष 1204.75 मिमी बारिश दर्ज हुई थी, जबकि इस वर्ष मात्र 584.25 मिमी ही मिली है। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले आधा से भी कम है। इस कमी ने स्थानीय जल स्रोतों को प्रभावित किया है।
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धोलावड़ बांध में पानी की कमी से सिंचाई पर रोक
रतलाम शहर और आसपास के गांवों को पेयजल व सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने वाला धोलावड़ बांध इस वर्ष केवल 45 प्रतिशत ही भरा है। इस वजह से कलेक्टर ने रबी फसलों की सिंचाई के लिए बांध से पानी छोड़ने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह कदम पेयजल संकट से बचाव के लिए उठाया गया है।
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कलेक्टर से पुनर्विचार की मांग की
सिंचाई पर पानी रोकने के आदेश के बाद सैलाना क्षेत्र के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कलेक्टर को पत्र लिखकर इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने किसानों को आवश्यक पानी उपलब्ध कराने पर जोर दिया है ताकि फसलें बर्बाद न हों।
किसानों की ओर से रतलाम को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग
सूखे और पानी की भारी कमी के कारण स्थानीय किसानों ने प्रशासन से रतलाम जिले को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित करने की अपील की है। इससे राहत पैकेज और सरकारी मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्षेत्र की प्रमुख नदियां माही, चंबल और मलेनी सूखी पड़ी हैं
कम वर्षा के कारण माही, चंबल और मलेनी नदियों में जल स्तर बहुत नीचे चला गया है। नदियों के सूखने से भूमिगत जलस्तर पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। इससे कृषि और पेयजल दोनों क्षेत्रों में संकट और बढ़ गया है।
जल संकट से आम किसान और ग्रामीण प्रभावित
जल स्रोतों के सूखने और सिंचाई पर रोक के कारण किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की कमी से आम जनता भी दिक्कतों का सामना कर रही है। यदि अगली बारिश नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।



