राहुल गांधी ने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर जोरदार हमला किया है। उन्होंने इस प्रक्रिया को संविधान के खिलाफ बताया और चुनाव आयोग को संविधान के दुश्मन करार दिया। यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद के बीच आया है।
चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद की शुरुआत
चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर विवाद ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद उभरा। रिपोर्ट में बताया गया कि चुनाव आयोग के तीन सदस्यीय पैनल में मतदाता सूची के प्रबंधन को लेकर गहरे मतभेद हुए। दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं।
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इन आपत्तियों में मतदाता नाम जोड़ने, हटाने और फॉर्म-6 में बदलाव से जुड़े फैसलों पर असहमति जताई गई। इस विवाद ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला और आरोप
इस खुलासे के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर SIR प्रक्रिया को “वोट चोरी” (#VoteChori) बताया। उन्होंने लिखा कि संविधान के दुश्मन बेनकाब हो चुके हैं और न्याय मिलेगा। उन्होंने इसे देश के खिलाफ राजद्रोह और संविधान पर हमला करार दिया।
राहुल गांधी ने 24 सितंबर 2026 को शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे पर विस्तार से बात करने का ऐलान किया है। यह कदम इस विवाद को सार्वजनिक और राजनीतिक रूप से और अधिक तूल देने वाला माना जा रहा है।
चुनाव आयोग का विवाद पर आधिकारिक जवाब
चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया में मतभेदों की खबरों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि आपत्तियां केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थीं। सभी अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में किए गए बदलाव पारदर्शी और नियमों के अनुसार हुए हैं। यह बयान विवाद के बीच आयोग की स्थिति मजबूत करने का प्रयास है।
विपक्षी दलों की मांगें और राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। वहीं, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने आयोग के खिलाफ कार्रवाई और हाल के विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग उठाई है।
यह विरोधाभासी राजनीतिक मांगें चुनाव आयोग की साख पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया से चुनावों की निष्पक्षता प्रभावित हुई है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का महत्व
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करना है। इस प्रक्रिया में नए मतदाताओं का नामांकन, मृतक या निष्क्रिय मतदाताओं को हटाना शामिल होता है। हालांकि, विवाद ने इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।
सही और निष्पक्ष मतदाता सूची लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है।
इस विवाद का आम जनता पर प्रभाव और आगे की संभावनाएं
यह विवाद चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है। आम जनता के बीच मतदान प्रक्रिया पर भरोसा प्रभावित हो सकता है। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जनभागीदारी पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
आगे जांच और राजनीतिक बहस जारी रह सकती है। प्रेस कॉन्फ्रेंस और संभावित कानूनी कदम इस विवाद को और बढ़ा सकते हैं। चुनाव आयोग की जवाबदेही और फैसलों की पारदर्शिता अब मुख्य मुद्दा बनेगी।



