शहबाज शरीफ ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में देश ने जो आर्थिक प्रगति हासिल की थी, उसे इस संघर्ष ने गंभीर झटका पहुंचाया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के प्रयास लगातार जारी रखेगी। उन्होंने बताया कि फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। युद्ध से पहले पाकिस्तान का साप्ताहिक तेल खर्च करीब 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर था, जो अब बढ़कर 80 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है।
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कैबिनेट बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने बताया कि स्थिति पर नजर रखने के लिए एक विशेष कार्यबल रोजाना समीक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि पाकिस्तान ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में शुरू हुई, जो करीब 21 घंटे तक चली। फिलहाल दोनों देशों के बीच युद्धविराम लागू है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संघर्ष जल्द समाप्त होगा। साथ ही पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है।



