अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है, जिससे क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह कदम तब उठाया, जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही। इसके बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी जहाजों को रोकने का ऐलान किया।
इस कार्रवाई पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में निगरानी बढ़ाई, तो ईरान अमेरिकी जहाजों को डुबाने से पीछे नहीं हटेगा।
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ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पूर्व प्रमुख मोहसिन रेजाई ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका को इस जलमार्ग का “पुलिस अधिकारी” बनने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अमेरिकी जहाज ईरान की पहली मिसाइलों का निशाना बन सकते हैं और उन्हें नष्ट किया जा सकता है।
अमेरिकी नौसेना के जहाज इस समय ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे हैं, जबकि सेंट्रल कमांड ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को सख्ती से लागू कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि उसकी सेनाएं पूरी तरह सतर्क हैं और इस क्षेत्र में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए हर समय तैयार हैं।



