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होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय टैंकरों को गुजरने की अनुमति बातचीत का परिणाम ;जयशंकर
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के बावजूद ईरान ने भारतीय टैंकरों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि यह लगातार बातचीत का परिणाम है और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है।
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान के साथ संघर्ष तेज हो गया है। इसी दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अपने नियंत्रण में लेकर इस समुद्री मार्ग को बंद कर दिया था। हालांकि भारत के साथ बातचीत के बाद तेहरान ने भारतीय टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक साक्षात्कार में कहा कि बातचीत से ही परिणाम निकलते हैं और यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, “मैं लगातार उनसे बातचीत कर रहा हूं और इस बातचीत के कुछ सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। यह प्रक्रिया अभी जारी है और यदि इससे समाधान निकलता दिखता है तो हम इसे आगे भी जारी रखेंगे।”
उन्होंने कहा कि भारत के दृष्टिकोण से संवाद के जरिए समाधान निकालना ही बेहतर रास्ता है। उनका कहना था कि आपसी चर्चा और तालमेल से ही समस्याओं का हल निकाला जा सकता है।
विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए ईरान के साथ कोई व्यापक व्यवस्था नहीं है और हर जहाज की आवाजाही अलग-अलग परिस्थितियों में तय की जाती है।
उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि इस अनुमति के बदले ईरान को कोई विशेष लाभ दिया गया है। जयशंकर ने कहा कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से संबंध रहे हैं और उसी आधार पर बातचीत आगे बढ़ाई गई है।
उन्होंने कहा, “यह किसी तरह के आदान-प्रदान का मामला नहीं है। भारत और ईरान के बीच संबंध हैं और हम इस संघर्ष को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं।”
विदेश मंत्री ने आगे बताया कि अभी यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में है और उस क्षेत्र में भारत के कई और जहाज मौजूद हैं। इसलिए यह एक सकारात्मक कदम जरूर है, लेकिन स्थिति पर लगातार काम किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार भारतीय ध्वज वाले दो टैंकर, जिनमें पेट्रोलियम गैस भरी हुई थी, सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण यह जलमार्ग अब एक महत्वपूर्ण अवरोधक बिंदु बन गया है। यही रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एकमात्र समुद्री मार्ग है।



