मध्य पूर्व में तनाव अब खतरनाक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। अमेरिका द्वारा ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हवाई हमले किए जाने के बाद हालात तेजी से बदल रहे हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी चिंता में डाल दिया है।
इसी बीच ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी का एक बयान तेजी से चर्चा में है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अमेरिका को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि ईरान “हारने वालों से लड़ने से नहीं डरता।” उनका दावा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बताए गए आंकड़ों की तुलना में युद्ध में मारे गए या घायल हुए अमेरिकी सैनिकों की वास्तविक संख्या कहीं अधिक है और आने वाले समय में यह संख्या बढ़ सकती है।
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अजीजी ने अपने संदेश में यह भी संकेत दिया कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो इसका दायरा केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। उनके शब्दों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष व्यापक रूप लेता है तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व के साथ-साथ यूरोप, एशिया और वैश्विक व्यापार मार्गों पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका के हवाई हमले और ईरान की प्रतिक्रिया
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। विभिन्न क्षेत्रों में विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गईं, हालांकि इन हमलों से हुए वास्तविक नुकसान का आकलन अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका है।
दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने इन हमलों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी देश के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना ताकत का नहीं बल्कि हताशा का संकेत है। उनका कहना है कि ऐसे कदम क्षेत्रीय स्थिरता को और कमजोर कर सकते हैं तथा संघर्ष को और अधिक गंभीर बना सकते हैं।



