TMC सांसद Derek O’Brien ने संसद में विधेयकों को जल्दबाजी में पारित किए जाने का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार और BJP पर तीखा निशाना साधा है। ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि 17 दिनों में 10 विधेयक पास किए गए और प्रत्येक बिल को औसतन करीब 4 मिनट मिले। उन्होंने इस प्रक्रिया की तुलना ‘नूडल्स’ से करते हुए संसद को एक “गहरे, अंधेरे कमरे” में बदलने का आरोप लगाया।
ओ’ब्रायन के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या से संबंधित विधेयक को 4 मिनट में पारित किया गया, जबकि जन्म और मृत्यु का पंजीकरण विधेयक महज 2 मिनट में पास हुआ।
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इसी तरह Bankers’ Books Evidence Bill और Taxation and Other Laws Bill को 3-3 मिनट, Appropriation (No. 3) Bill को 3 मिनट और MSME Development Bill को 3 मिनट में पारित किए जाने का दावा किया गया है।
वहीं, Tribunal Reforms Bill को 4 मिनट, Kerala (Name Change) Bill को 2 मिनट और Cooperative Development Corporation Bill को 4 मिनट में पास किए जाने की बात कही गई है। National Honour के अपमान की रोकथाम से संबंधित विधेयक को 10 मिनट मिले।
ओ’ब्रायन लंबे समय से संसद में विधायी प्रक्रिया, बहस और सार्वजनिक भागीदारी से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं।
उनके ताजा बयान ने एक बार फिर Parliament, Modi Government, BJP और Opposition के बीच कानून बनाने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। हालांकि, ओ’ब्रायन द्वारा बताए गए समय और आंकड़ों को उनके बयान के संदर्भ में देखना जरूरी है; केवल पारित होने में लगे समय से किसी विधेयक की पूरी संसदीय प्रक्रिया का आकलन नहीं किया जा सकता।
आपका क्या कहना है?
क्या संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा और बहस होनी चाहिए, या सरकार को विधायी काम तेजी से पूरा करने का अधिकार है?
आप डेरेक ओ’ब्रायन के आरोपों से सहमत हैं या नहीं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



