महाराष्ट्र के 74% क्षेत्र में सूखा की स्थिति के चलते राज्य सरकार ने 26 सितंबर 2026 को 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इस कदम से प्रभावित क्षेत्र की व्यापकता और गंभीरता सामने आ गई है।
महाराष्ट्र में बारिश की कमी और सूखाग्रस्त क्षेत्र की घोषणा
महाराष्ट्र सरकार ने सूखा प्रबंधन नियमावली के तहत 358 तहसीलों में से 265 को सूखाग्रस्त घोषित किया है। यह लगभग 74 प्रतिशत क्षेत्रफल को प्रभावित करता है। राज्य के 32 जिलों में बारिश में भारी कमी और मानसून के सूखे के कारण यह निर्णय लिया गया। ‘ट्रिगर-1’ मानक के अनुसार प्रभावित तहसीलों की पहचान की गई है।
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बारिश के आंकड़े और सबसे ज्यादा प्रभावित संभाग
1 जून से 18 सितंबर 2026 के बीच महाराष्ट्र में औसत बारिश 932.3 मिमी के मुकाबले सिर्फ 755.9 मिमी हुई, जो सामान्य से 18.8% कम है। छत्रपति संभाजीनगर संभाग (मराठवाड़ा) में बारिश की कमी सबसे अधिक 30.8% रही। पुणे और नासिक में लगभग 30%, जबकि अमरावती और नागपुर संभागों में 27% की कमी दर्ज हुई। सोलापुर, लातूर और अमरावती जैसे जिलों में बारिश की कमी 40 से 50 प्रतिशत तक पहुंच गई।
प्रभावित जिलों और उनके हालात
सोलापुर, अहिल्यानगर, नासिक, लातूर, बीड, बुलढाणा, अमरावती, यवतमाल, नागपुर और चंद्रपुर जिले सूखे से सबसे अधिक प्रभावित हैं। धाराशिव और बीड जैसे जिलों में जुलाई के बाद से बारिश लगभग न के बराबर रही है। इस वजह से किसानों को भारी नुकसान हुआ है।

खरीफ फसलों पर सूखे का असर
पानी की कमी के कारण सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, तूर, मूंग और उड़द जैसी खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं। कई इलाकों में फसल खराब हो चुकी है और कीट तथा बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ा है। इससे किसानों की आमदनी पर बुरा असर पड़ा है।
सरकार की राहत योजनाएं और प्रशासनिक कदम
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रभावित किसानों के लिए 12 राहत उपायों की घोषणा की है। इनमें फसल ऋण पुनर्गठन, जमीन के लगान में छूट, कृषि पंपों के बिजली बिल में छूट शामिल हैं। इसके अलावा, परीक्षा फीस माफ करना, रोजगार गारंटी योजना में ढील, पीने के पानी के टैंकर और मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध करवाना भी शामिल है। जिला कलेक्टरों को फसल नुकसान का पारदर्शी आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।
आगे की संभावनाएं और राहत कार्यों की दिशा
सरकार ने फसल नुकसान का सर्वेक्षण तेजी से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। जमीनी रिपोर्टों, तस्वीरों और जीपीएस डेटा के आधार पर जल्द ही आर्थिक मदद जारी की जाएगी। इससे प्रभावित किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल, सूखा प्रभावित इलाकों में पानी और चारे की आपूर्ति प्राथमिकता पर है।



