चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र वोटरों के नाम हटाने पर आपत्ति की समय-सीमा बढ़ाई है। यह निर्णय महाराष्ट्र में चल रही विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए दी गई समय-सीमा को बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।
दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की नई अंतिम तिथि
भारत निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, सुधारने या हटाने के लिए दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि को पहले 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 12 अक्टूबर 2026 कर दिया है। इस विस्तार से उन मतदाताओं को राहत मिली है जिनके नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर रह गए थे या जिन्हें नोटिस भेजे गए थे।
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इस समय-सीमा में बढ़ोतरी का मकसद अधिक से अधिक मतदाताओं को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने और नाम पुनः जुड़वाने का अवसर प्रदान करना है।

दावों के निपटारे और अंतिम मतदाता सूची की तिथि तय
चुनाव आयोग ने दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए नई अंतिम तिथि 10 नवंबर 2026 निर्धारित की है। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 16 नवंबर 2026 को किया जाएगा, जो पहले 4 नवंबर तय थी। यह बदलाव प्रक्रिया को व्यवस्थित और व्यापक बनाने के लिए किया गया है।
इसका मतलब है कि मतदाता सूची के अंतिम रूप में नाम जुड़ने या हटाने के मामलों को अधिक विस्तार से जांचा जाएगा।
मतदाताओं को व्यक्तिगत उपस्थिति से राहत
चुनाव आयोग ने यह भी निर्णय लिया है कि जिन मतदाताओं को विसंगतियों या मैपिंग की कमी के कारण नोटिस मिला है, उन्हें अब चुनाव कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी।
इसके बजाय, बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें चुनाव आयोग के ECINet पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इससे मतदाताओं को भारी असुविधा से बचाया जाएगा।

ऑनलाइन सुनवाई को प्राथमिकता
चुनाव आयोग ने सुनवाई के लिए ऑनलाइन माध्यम को प्राथमिकता देने का भी फैसला किया है। केवल विशेष परिस्थितियों में ही व्यक्तिगत सुनवाई होगी। इसके अलावा, मतदाता के परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य उनकी ओर से अधिकृत होकर सुनवाई में भाग ले सकता है।
यह व्यवस्था सुनवाई प्रक्रिया को सरल और तेज़ बनाएगी तथा कोविड-19 जैसी परिस्थितियों में सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
ड्राफ्ट मतदाता सूची में नामों का विश्लेषण
महाराष्ट्र में विशेष गहन संशोधन के तहत 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में 7.72 करोड़ नाम शामिल किए गए हैं। जबकि इससे पहले लगभग 9.79 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे।
इसका मतलब है कि 2.07 करोड़ मतदाताओं के विवरण फॉर्म संग्रहित नहीं हो पाए और वे ड्राफ्ट सूची से बाहर रह गए। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये नाम अंतिम रूप से हटाए नहीं गए हैं। वे दावे और आपत्तियां दाखिल कर पुनः नाम जुड़वा सकते हैं।
चुनाव आयोग की बैठक में लिए गए निर्णय
यह निर्णय 26 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की संयुक्त बैठक में लिया गया। बैठक में दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया और मतदाता सूची के प्रकाशन को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
इस बैठक से स्पष्ट हुआ कि आयोग मतदाताओं की सुविधा और सही-सटीक मतदाता सूची सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठा रहा है।



