NEET पेपर लीक पर सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, बोलीं- ‘छात्रों की आवाज दबाने के बजाय जवाबदेही तय करे सरकार’

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NEET पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोनिया गांधी ने शिक्षा व्यवस्था में कथित गिरावट, छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई, शिक्षा बजट में कटौती और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की है।

एक अखबार में लिखे लेख ’ में सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार जवाबदेही और शिक्षा सुधार की मांग कर रहे छात्रों को उनके भविष्य के अधिकार के लिए संघर्ष करने वाले युवाओं के रूप में देखने के बजाय उन्हें ‘देश का दुश्मन’ समझ रही है।

सोनिया गांधी ने कहा कि देशभर में छात्र परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, छात्रों की मांगें स्पष्ट हैं—सरकार अपनी जवाबदेही तय करे और शिक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार लागू करे।

NEET पेपर लीक पर सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, बोलीं- ‘छात्रों की आवाज दबाने के बजाय जवाबदेही तय करे सरकार’

छात्र प्रदर्शन को लेकर पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

सोनिया गांधी ने 20 जुलाई 2026 को हुए छात्र प्रदर्शन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) ने प्रदर्शनकारी छात्रों को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और पेलेट गन का इस्तेमाल किया।

उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए। सोनिया गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए।

अपने लेख में सोनिया गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की घटनाएं नई नहीं हैं। उन्होंने 2020 के CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए पुलिस कार्रवाई और विश्वविद्यालय परिसरों में पुलिस के प्रवेश का मुद्दा उठाया। उन्होंने महिला पहलवानों के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी जिक्र किया।

हालांकि, इन आरोपों पर केंद्र सरकार या संबंधित एजेंसियों की ओर से प्रतिक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

शिक्षा व्यवस्था पर सोनिया गांधी ने गिनाए तीन बड़े कारण

सोनिया गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े संकट के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं। इनमें सरकारी शिक्षा में कथित निवेश की कमी, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल और युवाओं के लिए रोजगार के सीमित अवसर शामिल हैं।

1. सरकारी शिक्षा से सरकार के पीछे हटने का आरोप

सोनिया गांधी ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने अपने कुल बजट में स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा के हिस्से में बड़ी कटौती की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में करीब एक लाख सरकारी स्कूल बंद हुए, जबकि हजारों निजी स्कूल खोले गए।

उन्होंने यह भी कहा कि देश के परिवार NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग पर बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं। सोनिया गांधी ने सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्याप्त निवेश किया जाना चाहिए।

2. NTA और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल

सोनिया गांधी ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली के केंद्रीयकरण और निजीकरण के कारण इसकी विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।

उन्होंने दावा किया कि NTA में कर्मचारियों की कमी है और यह निजी ठेकेदारों पर निर्भर है। सोनिया गांधी ने पिछले वर्षों में देश में हुए कथित पेपर लीक मामलों का भी जिक्र किया और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाने की मांग की।

NEET समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता पैदा की है। ऐसे में परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता, सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता पर बहस लगातार तेज हो रही है।

3. रोजगार और सरकारी जवाबदेही का मुद्दा

सोनिया गांधी ने कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं के सामने पर्याप्त और अच्छी नौकरियों के अवसर नहीं हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इतने बड़े विवाद के बावजूद उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब देने और अपनी जवाबदेही तय करने से बच रही है।

छात्रों के साथ खड़ा होना हमारा नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य’

सोनिया गांधी ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि आज छात्रों के साथ खड़ा होना और उनके भविष्य की रक्षा करना देश का नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक कर्तव्य है।

NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच सोनिया गांधी का यह बयान कांग्रेस के केंद्र सरकार पर हमले को और तेज करता है। विपक्ष लगातार सरकार से परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और छात्रों की समस्याओं के समाधान की मांग कर रहा है।

अब बड़ा सवाल यह है कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और NEET समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं। देश के लाखों छात्र और अभिभावक चाहते हैं कि परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी हो और मेहनत से परीक्षा देने वाले किसी भी छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।

आपकी राय क्या है?

NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर आपकी क्या राय है? क्या सरकार को NTA में व्यापक सुधार के साथ पेपर लीक रोकने के लिए और सख्त कदम उठाने चाहिए? क्या छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए?

क्या आपको लगता है कि देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े स्तर पर सुधार की जरूरत है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं और चर्चा में शामिल हों।

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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