संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान के आरोपों का करारा जवाब दिया। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कश्मीर संबंधी दावों और आतंकवाद के समर्थन को बेनकाब करते हुए अपनी मजबूती से अपनी बात रखी। यह जवाब भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम में प्रमुख भूमिका निभाई भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने, जिन्होंने पाकिस्तान के झूठ और आतंकवाद को वैश्विक मंच पर उजागर किया।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के भाषण और भारत का तत्काल जवाब
25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने फिर से कश्मीर को लेकर भारत पर आरोप लगाए। उन्होंने 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समय पर हस्तक्षेप का श्रेय दिया। हालांकि, भारत ने तुरंत ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ का प्रयोग करते हुए पाकिस्तान के दावों को पूरी तरह खारिज किया। पेटल गहलोत ने इस मौके पर कहा कि पाकिस्तान की सेना ही वहां की असली सत्ता है, जो कठपुतली शासन चलाती है।
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पाकिस्तान के 27वें संवैधानिक संशोधन पर भारत की तीखी टिप्पणी
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के 27वें संवैधानिक संशोधन का जिक्र किया, जो नवंबर 2025 में पारित हुआ था। इसके तहत पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को कानूनी मुकदमों से आजीवन छूट दी गई है। भारत ने इसे पाकिस्तान की सेना के प्रभाव और उसकी असली सत्ता को दर्शाने वाला कदम बताया। यह संशोधन पाकिस्तान में सैन्य शासन की स्थिरता और उसकी गुप्त ताकत का प्रमाण माना जा रहा है।
आतंकवाद के समर्थन पर भारत ने दी कड़ी चेतावनी
भारत ने पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करने पर कड़ी चेतावनी जारी की। पेटल गहलोत ने स्पष्ट कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने का अधिकार रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के आतंकवादी हरकतों के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस बयान से साफ है कि भारत आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
ओसामा बिन लादेन और 9/11 का उल्लेख कर पाकिस्तान की पोल खोली
भारत ने 9/11 के 25वें वर्षगांठ के अवसर पर याद दिलाया कि सबसे बड़े आतंकवादी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की मुख्य सैन्य अकादमी के पास शरण लिए हुए थे। यह तथ्य पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति को उजागर करता है। इस माध्यम से भारत ने यह भी संकेत दिया कि पाकिस्तान की नीति वैश्विक शांति के लिए खतरा है और उसे इसे बदलना होगा।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन और ईशनिंदा कानूनों की आलोचना
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लगातार उल्लंघन और विवादित ईशनिंदा कानूनों की भी कड़ी आलोचना की। पेटल गहलोत ने कहा कि जो देश अपने नागरिकों के अधिकारों का दमन करता है, उसे मानवाधिकारों की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। इससे पाकिस्तान की अंदरूनी सामाजिक स्थिति पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं।
भारत-पाकिस्तान संबंधों पर संयुक्त राष्ट्र में कड़ा संदेश
संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए इस जवाब से भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह कश्मीर, आतंकवाद और मानवाधिकारों को लेकर पाकिस्तान के झूठे दावों को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह कूटनीतिक मोर्चा भारत के लिए सकारात्मक साबित होगा। आने वाले समय में यह स्थिति दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने या बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।



