इंदौर। पिछले साल सामने आए स्टांप ड्यूटी घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच शुरू कर दी है। ईडी ने बिल्डर विवेक चुघ को नोटिस जारी किया है। एजेंसी ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की है। मामले में अन्य लोगों को भी नोटिस जारी किए जाने की संभावना है।
रजिस्ट्रार ने मिलकर किया था खेला
उल्लेखनीय है कि पिछले साल ईओडब्ल्यू ने इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। इनमें मेसर्स एक्सक्लूसिव रियल्टी के विवेक पुत्र मोहनलाल चुघ, मेसर्स सेवनहार्ट्स बिल्डकान एलएलपी के हितेंद्र मेहता, अजय कुमार जैन, पंजीयन कार्यालय के उपपंजीयक संजय सिंह और वरिष्ठ जिला पंजीयक अमरेश नायडू शामिल हैं।
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शहरी क्षेत्र की जमीन को बता दी ग्रामीण
रियल इस्टेट से जुड़े कारोबारियों ने इस खेल में अधिकारियों को दलाल के माध्यम से शामिल किया। जिसमें अधिकारियों ने उन्हें कम गाइडलाइन दर पर जमीन की रजिस्ट्री करने का रास्ता बताया। इसके बाद इन्होंने इस पुरे काम को अंजाम दिया। इसमें अधिकारियों ने भी मोटी रकम ली है। ईओडब्ल्यू के डीएसपी पवन सिंघल के मुताबिक आरोपितों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 61(2), 338, 336(3) एवं 340 भारतीय न्याय संहिता 2023 व धारा 7 (सी), भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 का प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
डीएलएफ गार्डन सिटी का नाम हटा दिया
आरोपियों ने डीएलएफ गार्डन सिटी टाउनशिप के एक बड़े कमर्शियल प्लॉट को 9 छोटे टुकड़ों में विभाजित कर दिया था। सरकारी अफसरों के साथ मिलकर मंजूर किए गए रिवाइज्ड ले-आउट प्लान में छेड़छाड़ की थी। उन्होंने रिकॉर्ड से प्रोजेक्ट का नाम ‘डीएलएफ गार्डन सिटी’ हटा दिया और ऑनलाइन केवल अधूरी जानकारी अपलोड की। इसके जरिए जमीन की रजिस्ट्री डीएलएफ गार्डन सिटी के लिए लागू 50,800 रुपये प्रति वर्गमीटर की गाइडलाइन दर के बजाय मांगलिया गांव के लिए लागू 14,200 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से कराई गई।
सरकार को 13.32 करोड़ का नुकसान
ईओडब्ल्यू की जांच में आरोप लगाया गया था कि गाइडलाइन दर में इस अंतर के कारण सरकार को करीब 13 करोड़ 32 लाख 95 हजार रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। इसी मामले में पिछले साल पांच लोगों पर प्रकरण दर्ज किया गया था।
ईडी की जांच में होंगे कई खुलासे
अब ईडी द्वारा पीएमएलए के तहत जांच शुरू किए जाने के बाद मामले का दायरा बढ़ सकता है। चूंकि ईओडब्ल्यू की जांच में एक बहुत बड़ा वित्तीय अपराध पाया गया था, इसी को आधार बनाकर अब केंद्रीय एजेंसी ईडी ने इसमें हस्तक्षेप किया है। सरकारी पैसे की हेराफेरी और अवैध धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को ठिकाने लगाने के संदेह में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत यह कार्रवाई आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में कुछ और बड़े नामों को नोटिस या पूछताछ का सामना करना पड़ सकता है।
खुलेआम सरकार को चूना लगाते रहे अफसर
रजिस्ट्रार ऑफिस में भ्रष्टाचार की बात जगजाहिर है। ये अफसर भूमाफियाओं के साथ सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाते रहते हैं, फिर भी इन पर कोई एक्शन नहीं होता। काफी समय बाद इस बड़े मामले में जिला पंजीयक से लेकर उप पंजीयक तक के नाम सामने आए हैं। उम्मीद की जा रही है कि ईडी इन पर सख्त कार्रवाई करेगी।



