संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर को लेकर कड़ा जवाब दिया। भारत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस विषय में कोई समझौता नहीं होगा। इस बहस के दौरान पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोपों को भारत ने पूरी तरह खारिज किया।
UNHRC के 63वें सत्र में कश्मीर मुद्दे पर भारत-पाकिस्तान की बहस
जिनेवा में 7 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक चल रहे UNHRC के 63वें नियमित सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) पर चर्चा हुई। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री मोहम्मद इशाक डार ने भारत पर आरोप लगाए कि वह क्षेत्र की पहचान और सांस्कृतिक संरचना को बदल रहा है। इसके जवाब में भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अविभाज्य हिस्से हैं।
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भारत ने पाकिस्तान के दुष्प्रचारों को सिरे से खारिज किया
भारत ने अपने राइट ऑफ रिप्लाई में कहा कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भारत का आंतरिक मामला है। भारत ने बताया कि कश्मीर में भारत ने विकास के कई उपाय किए हैं, जबकि पाकिस्तान ने PoK में अवैध कब्जा कर रखा है। भारत ने जोर देकर कहा कि PoK में मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और वहां के नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का हनन हो रहा है।
PoK में मानवाधिकारों की स्थिति पर कश्मीरी कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर का बयान
22 सितंबर 2026 को UNHRC में कश्मीरी सामाजिक कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर ने PoK में हालिया मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर किया। उन्होंने बताया कि वहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई हुई, सैकड़ों लोग गिरफ्तार किए गए और इंटरनेट सेवाएं बाधित की गईं। तस्लीमा ने संयुक्त राष्ट्र से स्वतंत्र जांच की मांग की ताकि नागरिकों की मौतों और दमन की घटनाओं की निष्पक्ष जांच हो सके।
UN मानवाधिकार प्रमुख ने भारत के कदमों की सराहना की
UN के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने पाकिस्तान द्वारा प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग की आलोचना की। उन्होंने भारत के जम्मू-कश्मीर में युवाओं के साथ संवाद स्थापित करने और विकास को बढ़ावा देने के तरीकों की प्रशंसा की। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत बनाता है।
भारत ने विकास और सुरक्षा में अपने प्रयासों को उजागर किया
भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। इसके विपरीत, PoK में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और आर्थिक अस्थिरता के कारण वहां के लोग बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं। इस तुलना ने भारत की कूटनीतिक ताकत को बढ़ावा दिया।
आगे की संभावनाएं और कूटनीतिक प्रभाव
UNHRC में भारत का यह कड़ा रुख पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे कश्मीर मुद्दे पर भारत की साख मजबूत हुई है। भविष्य में भी भारत इसी तरह के मंचों पर अपनी स्थिति दृढ़ता से रखेगा। आम नागरिकों के लिए यह आश्वासन है कि जम्मू-कश्मीर की संप्रभुता और विकास प्राथमिकता बने रहेंगे।



