बालाघाट में करंट लगने से 12 वर्षीय बाघ की मौत की घटना ने वन विभाग और संरक्षण कार्यकर्ताओं को झकझोर कर रख दिया है। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के उत्तर सामान्य वन मंडल के पूर्व बैहर परिक्षेत्र के खुरमुंडी बीट में शनिवार, 7 नवंबर 2026 को यह दुखद घटना सामने आई।
बालाघाट में करंट लगने से बाघ की मौत कैसे हुई?
खुरमुंडी बीट के जंगल में गश्त के दौरान बीट गार्ड को 12 वर्षीय नर बाघ का शव पाया गया। शुरुआती जांच में बाघ की मौत विद्युत करंट लगने से होने की संभावना जताई गई है। घटनास्थल से जीआई तार और खूंटियां बरामद हुई हैं, जिससे यह संदेह और मजबूत हुआ कि करंट लगने की वजह से बाघ की जान गई।
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वन विभाग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की। शव का पोस्टमार्टम तीन सदस्यीय चिकित्सक दल ने किया, जिससे मौत के कारणों की पुष्टि की जाएगी।
घटना स्थल की भौगोलिक और पर्यावरणीय महत्ता
यह घटना कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के कोर और बफर जोन के निकट खुरमुंडी बीट में हुई है। यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां बाघ, तेंदुए सहित कई वन्यजीव पाए जाते हैं। पिछले 24 दिनों में इस क्षेत्र में वन्यजीवों की मौतों की संख्या 10 हो चुकी है, जिससे वन विभाग की चिंता बढ़ गई है।
इस इलाके में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
वन विभाग की कार्रवाई और संदिग्धों की गिरफ्तारी
डॉग स्क्वॉड की मदद से वन विभाग ने दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। संदिग्धों से पूछताछ जारी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बाघ की मौत करंट लगने से कैसे हुई और क्या इसमें किसी की संलिप्तता है।
वन मंडलाधिकारी रेशम सिंह धुर्वे ने बताया कि संदिग्धों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग ने प्रकरण दर्ज कर जांच को गहनता से आगे बढ़ाया है।

करंट लगने से वन्यजीवों की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
यह घटना वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी चिंता का विषय है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि शिकारियों ने जंगली सूअर का शिकार करने के लिए बिजली के तार का जाल बिछाया था, जो बाघ की मौत का कारण बना।
ऐसे विध्वंसकारी तरीकों से वन्यजीवों को गंभीर खतरा होता है। वन विभाग और संरक्षण संगठन इस समस्या से निपटने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अवैध शिकार रुका नहीं है।
बाघ संरक्षण के लिए यह एक बड़ा झटका
बालाघाट में करंट लगने से बाघ की मौत से स्थानीय लोगों में शोक और चिंता व्याप्त है। बाघ संरक्षण के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि भी मामले की जांच कर रहे हैं। बाघ की मौत से पारिस्थितिकी तंत्र पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि बाघ एक शीर्ष शिकारी होता है, जो जंगल के संतुलन को बनाए रखता है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा असली कारण
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत बाघ की मौत के वास्तविक कारणों का पता चलेगा। इसके आधार पर वन विभाग और प्रशासन कड़े कदम उठाएगा।
वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है ताकि इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही, वन्यजीव संरक्षण और शिकार रोकने के लिए स्थानीय समुदायों को भी जागरूक किया जाएगा।



