फारूक अब्दुल्ला ने महारैली में मुसलमानों को पाकिस्तानी क्यों कहें, इस सवाल को उठाकर एक बार फिर देश में सामाजिक सौहार्द और चुनावी मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी INDIA गठबंधन की महारैली में यह विषय प्रमुखता से सामने आया।
फारूक अब्दुल्ला ने महारैली में मुसलमानों को पाकिस्तानी क्यों कहें सवाल किया
INDIA गठबंधन की महारैली में फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार, भाजपा और आरएसएस पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश में मुसलमानों को बार-बार पाकिस्तानी बताना गलत है। फारूक ने मंच से पूछा, “भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तानियों की तरह क्यों देखा जाता है?” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुस्लिम समुदाय ने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और सभी धर्मों के लोग समान रूप से देश के नागरिक हैं।
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मतदाता सूचियों से एक करोड़ हिंदुओं के नाम कटने का आरोप
फारूक अब्दुल्ला ने मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग 1 करोड़ हिंदुओं के नाम वोटिंग लिस्ट से काटे गए हैं। उन्होंने सवाल किया, “क्या ये 1 करोड़ हिंदू भी पाकिस्तानी थे?” यह बयान चुनावी न्याय और लोकतंत्र की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण है। उनका यह दावा राजनीतिक दलों के बीच मतदाता अधिकारों की बहस को और तेज करेगा।
जम्मू-कश्मीर का भारत से जुड़ाव पर जोर
फारूक ने डॉ. बी.आर. आंबेडकर के संविधान का हवाला देते हुए कहा कि “जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।” उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विकास और वहां के लोगों के अधिकारों की रक्षा पर बल दिया। यह बयान जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति पर विवादों के बीच आया है।
गठबंधन के अन्य नेताओं की मौजूदगी और बयान
महारैली में कांग्रेस के राहुल गांधी, सपा के अखिलेश यादव और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती भी मंच पर मौजूद थे। महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर जनता से मतदान का अधिकार छीनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को मतदान का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए। इस तरह के बयान विपक्षी गठबंधन की एकजुटता दिखाते हैं।
फारूक अब्दुल्ला के विवादित बयान की पृष्ठभूमि
यह बयान फारूक अब्दुल्ला के 24 अक्टूबर 2026 के विवादित बयान के ठीक बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाकर वहां के लोगों की सुरक्षा कर रहा है। इस टिप्पणी के बाद भाजपा और अन्य संगठनों ने उनका विरोध किया। यह घटनाक्रम राजनीतिक तनाव को दर्शाता है।
सामाजिक सौहार्द और लोकतंत्र पर असर
फारूक अब्दुल्ला द्वारा मुसलमानों को पाकिस्तानी कहे जाने पर सवाल उठाना सामाजिक समरसता के लिए एक अहम पहलू है। देश में धार्मिक आधार पर भेदभाव बढ़ने की आशंका के बीच यह मुद्दा आम जनता को सोचने पर मजबूर करता है। वहीं, मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लोकतंत्र की जड़ को प्रभावित कर सकते हैं।



