उत्तरकाशी के केदारताल में फंसे 8 लोगों की तलाश जारी है। यह घटना गंगोत्री से केदारताल ट्रेक मार्ग पर लगभग 4,000 मीटर की ऊंचाई पर हुई है, जहां भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण सात ट्रेकर्स और एक गाइड फंसे हुए हैं। इस कठिन परिस्थिति में SDRF और अन्य एजेंसियां लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
केदारताल में फंसे लोगों की संख्या और स्थिति
इस दल में कुल 13 सदस्य थे, जिनमें सात ट्रेकर्स और छह सपोर्ट स्टाफ शामिल थे। 27 अक्टूबर को गंगोत्री से रवाना हुए इस दल को 29 अक्टूबर को वापस लौटना था। हालांकि, खराब मौसम और हिमस्खलन के कारण आठ लोग भोजखड़क से आगे फंस गए।
इनमें एक व्यक्ति के सिर में चोट भी आई है, जिससे उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बाकी चार सदस्य (तीन पोर्टर और एक कुक) को SDRF और स्थानीय टीमों ने कच्ची ढांग के पास सुरक्षित पाया है।
SDRF का केदारताल में जारी सर्च ऑपरेशन
SDRF की विशेष माउंटेनियरिंग टीम के नेतृत्व में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। 1 नवंबर तक SDRF और UCADA के हेलीकॉप्टर से दो बार हवाई सर्वेक्षण किया जा चुका है। हालांकि, भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण फंसे लोगों या उनके कैंप का कोई स्पष्ट निशान नहीं मिला है।
निगरानी जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से जिलाधिकारी प्रशांत आर्य और SDRF कमांडेंट अर्पण यदुवंशी कर रहे हैं, जो टीमों के समन्वय और अभियान की गति बढ़ा रहे हैं।
अन्य एजेंसियों की भूमिका और बचाव प्रयास
SDRF के अलावा NDRF, वन विभाग, पुलिस, सेना और स्थानीय ट्रेकिंग एजेंसी की टीमें भी बचाव अभियान में सक्रिय हैं। शनिवार को 10 सदस्यीय NDRF टीम गंगोत्री के लिए रवाना हुई। वन विभाग के कर्मचारी और ट्रेकिंग एजेंसी के सदस्य भी रास्ता खोलने और फ़ंसे हुए लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।
तकरीबन छह किलोमीटर तक रास्ता साफ करने के बाद, बर्फ और हिमस्खलन के कारण टीमों को वापस लौटना पड़ा। इसके बावजूद बचाव दल लगातार नई रणनीतियों के साथ प्रयास जारी रखे हुए हैं।

केदारताल ट्रेक की कठिनाई और मौसम की बाधाएं
केदारताल ट्रेक समुद्र तल से लगभग 4,750 मीटर ऊंचाई पर स्थित है, जहां मौसम अचानक बदल जाता है। नवंबर के महीने में भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की घटना आम होती है। इस कारण ट्रेकिंग और रेस्क्यू दोनों ही बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं।
भारी बर्फबारी से रास्ते पूरी तरह से बंद हो गए हैं, जिससे बचाव दल को सुरक्षित मार्ग ढूंढने और संभावित हिमस्खलन के खतरे से बचते हुए आगे बढ़ना पड़ रहा है।
फंसे लोगों की सुरक्षा और भविष्य की योजनाएं
प्रशासन ने फंसे लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर खास ध्यान दिया है। एक घायल ट्रेकर के लिए प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की तैयारी है।
मौसम में सुधार होते ही हेलीकॉप्टर से हवाई बचाव अभियान चलाने की योजना है। यदि हवाई मार्ग से रेस्क्यू संभव नहीं हुआ, तो जमीन के रास्ते बचाव जारी रहेगा।
जिला प्रशासन का समन्वय और सतत निगरानी
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बचाव अभियान में शामिल सभी विभागों को कड़ी निगरानी और समन्वय के निर्देश दिए हैं। वन विभाग, SDRF, NDRF और ट्रेकिंग एजेंसियां मिलकर लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
फंसे हुए आठ लोगों को सुरक्षित निकालना प्रशासन की प्राथमिकता है, जिसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।



