संयुक्त राष्ट्र में भारत ने जम्मू-कश्मीर और PoK के मुद्दे पर पाकिस्तान के दावों को पूरी तरह खारिज किया। इस दौरान भारत ने PoK में बिजली और रोटी की समस्या को उजागर करते हुए वहां के मानवीय संकट पर भी प्रकाश डाला। भारतीय प्रतिनिधि भाविका मंगलानंदन ने संयुक्त राष्ट्र की महासभा की तीसरी समिति की अक्टूबर 2026 की बैठक में कड़ा जवाब दिया।
भारत ने जम्मू-कश्मीर को बताया अविभाज्य हिस्सा
भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति हमेशा बनी रहेगी और किसी भी तरह के पाकिस्तान के दावे बेमानी हैं।
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इस तरह भारत ने विश्व समुदाय के सामने अपनी संप्रभुता का दृढ़ता से पक्ष रखा। यह मुद्दा भारत के लिए संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

PoK में बिजली और रोटी की समस्या उजागर
भाविका मंगलानंदन ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र PoK में बुनियादी आवश्यकताएं जैसे रोटी और बिजली तक की भारी कमी है। वहां के नागरिक अपने मूलभूत अधिकारों की मांग कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तानी प्रशासन उनकी आवाज दबा रहा है।
उन्होंने बताया कि रावलकोट जैसे शहरों में नागरिकों पर हिंसक कार्रवाई की जा रही है, जो मानवीय गरिमा के लिए चिंता का विषय है।
पाकिस्तानी सेना और राजनीतिक व्यवस्था पर भारत का हमला
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था की भी आलोचना की। कहा गया कि पाकिस्तानी नागरिक सरकारें सेना के दबाव में काम करती हैं और अक्सर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पातीं।
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बिगड़ती सेहत और जेल में कैद होने का जिक्र करते हुए भारत ने बताया कि वहां पूर्व सत्ताधारी पार्टी को चुनाव लड़ने तक की अनुमति नहीं दी गई।

PoK में प्रदर्शनकारियों पर क्रूर कार्रवाई
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि PoK में बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना द्वारा सैकड़ों नागरिकों की हत्या की गई है। पाकिस्तान सरकार इन घटनाओं को छिपाने के लिए कश्मीर का मुद्दा उठाती है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि वहां का हालात कितना गंभीर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देना चाहिए।
प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध
भारत ने यह भी बताया कि पाकिस्तान में स्वतंत्र मीडिया को PoK और अन्य क्षेत्रों में हो रहे दमन की खबरें प्रकाशित करने से रोका जाता है। इससे वास्तविक स्थिति विश्व के सामने नहीं आ पाती।
इस तरह की सेंसरशिप से वहां के नागरिकों की आवाज दबाई जाती है और मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है।
PoK से अवैध कब्जा हटाने की मांग पर जोर
अंत में भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का केवल एक ही विवादित मुद्दा बचा है, वह है पाकिस्तान द्वारा अवैध कब्जे वाले PoK को खाली करना। भारत ने इस पर पुनः अपनी मजबूत स्थिति रखी।
यह कदम क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए आवश्यक है और इसके बिना कोई समाधान संभव नहीं।



