बाल विवाह के खिलाफ भारत की मुहिम को वैश्विक मान्यता मिली है। 27 नवंबर को संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया है। यह भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और सामाजिक जीत है।
संयुक्त राष्ट्र का ऐतिहासिक कदम
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से 27 नवंबर को ‘बाल विवाह उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित किया। यह कदम भारत की बाल विवाह विरोधी मुहिम के लिए एक महत्वपूर्ण मान्यता है।
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भारत की मुहिम को मिली वैश्विक पहचान
भारत में बाल विवाह के उन्मूलन की दिशा में किए गए प्रयासों को अब वैश्विक स्तर पर पहचान मिल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस अभियान ने एक व्यापक आंदोलन का रूप ले लिया है।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की भूमिका
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने इस मान्यता को एक स्वर्णिम तमगे की तरह बताया है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बच्चों की आवाज़ को बुलंद किया है।
बाल विवाह के आंकड़ों में गिरावट
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, 2019-21 में 20-24 वर्ष की आयु की 23.3% लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले हो गई थी। 2023-24 में यह आंकड़ा 20.1% पर आ गया।
आम आदमी पर असर
यह निर्णय आम नागरिकों को बाल विवाह जैसी कुप्रथा से लड़ने के लिए प्रेरित करेगा। इसके अलावा, इस पहल से लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद है।
आगे की दिशा
भारत सरकार का लक्ष्य 2026 तक बाल विवाह के प्रचलन को 10% तक कम करना है। यह अंतरराष्ट्रीय दिवस इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा।



