मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बाद प्रशासन ने पन्ना में रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया है। दरअसल बृजपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला उमरी गांव चारों ओर से पानी से घिरकर टापू में बदल गया है। इस वजह से गांव का सड़क संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह टूट गया है।
बाघिन नदी के उफान से जलमग्न हुआ उमरी गांव
दरअसल क्षेत्र में बीते दो दिनों से भीषण बारिश का दौर जारी है। नतीजतन बाघिन नदी और बचान नाला अचानक रौद्र रूप में आ गए हैं। इसके चलते 10 से 12 आदिवासी परिवारों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया।
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इसके अलावा खेतों में दो से ढाई फीट तक पानी भर गया है। इससे किसानों की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं कई कच्चे मकानों की दीवारें ढहने से ग्रामीणों का अनाज और घरेलू सामान बर्बाद हो गया।

पन्ना में रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत 47 लोगों को बचाया
हालात बिगड़ते ही जिला मुख्यालय से राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (SDERF) की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद जवानों ने मोटर बोट की मदद से पानी में फंसे 47 ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाला।
रेस्क्यू किए गए लोगों के लिए प्रशासन ने जरूरी इंतजाम किए हैं:
- सभी प्रभावित ग्रामीणों को हनुमतपुर के प्राथमिक विद्यालय में बने राहत शिविर में पहुंचाया गया।
- विस्थापित परिवारों को भोजन, शुद्ध पेयजल और जरूरी दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
- वहीं गांव के चार बुजुर्गों को उमरी गांव में ही एक सुरक्षित स्थान पर ठहराया गया है।

धरमपुर नाले का पानी पुल के ऊपर बहने से मार्ग बंद
इस बीच तेज बहाव के कारण धरमपुर नाला भी विकराल रूप में आ गया। नतीजतन पानी पुल से लगभग दो फीट ऊपर बहने लगा। इसलिए पन्ना-पहाड़ीखेड़ा मुख्य मार्ग पर वाहनों का आवागमन कई घंटों तक पूरी तरह ठप रहा।
हालांकि पुलिस और प्रशासन ने दोनों तरफ बैरिकेड्स लगाकर लोगों को खतरे से दूर रखा। इसके साथ ही राहगीरों को पानी कम होने तक सुरक्षित स्थानों पर रुकने की हिदायत दी गई।
पन्ना में रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद प्रशासन की पैनी नजर
फिलहाल नायब तहसीलदार राजेश सोनी ने प्रशासनिक टीम के साथ प्रभावित इलाके का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने राजस्व अधिकारियों को नुकसान का आकलन करने और जलस्तर पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए।
बहरहाल प्रशासन ने नदी-नालों के किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा किसी भी नई आपात स्थिति से निपटने के लिए बचाव दलों को 24 घंटे तैयार रहने को कहा गया है।



